खास बातें28 दिसबंर, 2018 तक निचली अदालतों में 30 साल पुराने लंबित मामलों की संख्या 66 हजार है।निचली अदालतों में लंबित मामलों को निपटाने में लगेंगे 324 साल।उत्तर प्रदेश में 30 सालों से सबसे ज्यादा 26,000 मामले लंबित हैं। बिहार के बक्सर के रहने वाले राहुल पाठक ने 5 मई, 1951 को मामला दर्ज किया था। राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के रिकॉर्ड के अनुसार यह मामला अभी भी जिरह के स्तर पर है और इसकी आखिरी सुनवाई 18 नवंबर, 2018 को हुई थी। अदालत ने अभी तक सुनवाई की अगली तारीख अपडेट नहीं की है। यह कहानी थोड़ी असमान्य जरूर है लेकिन अकेली नहीं है। इस तरह के हजारों ऐसे मामले हैं जो पिछले 50-60 सालों से अदालतों में लंबित पड़े हुए हैं। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 1951 से निचली अदालतों में 60 साल से ज्यादा पुराने मामले लंबित हैं। 28 दिसबंर, 2018 तक निचली और अधीनस्थ अदालतों में 30 साल पुराने लंबित मामलों की संख्या 66,000 हजार है। वहीं पांच साले पुराने मामलों की संख्या 60 लाख है। सरकार द्वारा हाल में किए गए मूल्यांकन से पता चला है कि यदि वर्तमान में मामलों को निपटाया जाए तो अधीनस्थ अदालतों में लं...