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विभाग को लेकर अब भी फंसा पेंच, विधायक ने कहा, 'बड़े नेता का बेटा होता तो जरूर मंत्री बनता'







मध्यप्रदेश में नई सरकार बनने के अब कांग्रेस नई चुनौती का सामना कर रही है। कांग्रेस को यह चुनौती पार्टी के ही नेता देते दिख रहे हैं। मंत्री नहीं बनाए जानों को लेकर उठा बगावत का बवंडर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इसी कड़ी में बदनावर सीट से कांग्रेस के विधायक राजवर्धनसिंह दत्तीगांव ने पार्टी पर वंशवाद के नाम पर हक मारने का आरोप लगाया है।



जनता की उम्मीद चढ़ी पक्षपात के भेंट: दत्तीगांव

राजवर्धनसिंह दत्तीगांव ने कहा कि क्षेत्र की जनता को इस बार उनके मंत्री बनने की उम्मीद थी मगर वंशवाद की वजह से उनका हक छीन लिया गया। मैं इस अन्याय का बदला इस्तीफे से दूंगा उन्होंने कहा कि मंत्री बनने का मुझे शौक नहीं बल्कि यह मेरा हक है। अगर मैं किसी बड़े नेता या पूर्व मुख्यमंत्री का बेटा होता तो जरूर मंत्री बनता। बदनावर सीट से राजवर्धनसिंह दत्तीगांव ने 41 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी।

वहीं कांग्रेस के नाराज विधायक केपी सिंह, ऐदल सिंह कंसाना, बिसाहूलाल सिंह समेत 10 विधायक दिल्ली पहुंच गए हैं। वह राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी बात रख सकते हैं।

समर्थकों ने दिया पार्टी को अल्टीमेटम

कांग्रेस विधायक और वरिष्ठ नेता केपी सिंह, ऐदल सिंह कंसाना, बिसाहूलाल सिंह के समर्थकों ने पार्टी को तीन दिनों का अल्टीमेटम देते हुए अपने नेता को मंत्री बनाए जाने की मांग की है। इसी कड़ी में सुमावली से ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मदन शर्मा ने कंसाना को मंत्री नहीं बनाने के विरोध में इस्तीफा दे दिया है।  यह तीनों ही नेता दिग्विजय सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। कई विभागो को लेकर अब भा पेंच फंसा हुआ है।

सिंधिया जहां गृह और परिवहन विभाग तुलसी सिलावट को दिलवाना चाहते हैं वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ की पसंद राजपुर विधायक बाला बच्चन है। अनुभव और वरिष्टता का हवाला देकर दिग्विजय सिंह डॉ. गोविंद सिंह को गृह विभाग दिलाने पर अड़े हैं। इसके अलावा दिग्विजय सिंह अपने बेटे और राघोगढ़ के विधायक बने जयवर्धन सिंह को वित्त विभाग देने की वकालत कर रहे हैं।

 



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