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चिदंबरम ने पूछा- जब सस्ते में की डील, तो 126 की बजाय 36 राफेल ही क्यों खरीदे?




ऐसा लगता है कि राफेल विवाद अभी कुछ और दिनों तक भारतीय राजनीति में छाया रहेगा। इस पर जारी विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय से केंद्र सरकार को बेशक क्लीनचिट मिल गई है लेकिन विपक्ष उसे क्नीलचिट देने के मूड में नहीं है। विपक्ष राफेल मुद्दे को संसद के शीतकालीन सत्र में भुनाना चाहता है और लगातार जेपीसी के गठन की मांग कर रहा है। न्यायालय के फैसले के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। अब पू्र्व वित्तमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट करके सरकार से सवाल पूछे हैं।



चार ट्वीट करके चिदंबरम का कहना है कि यदि केंद्र सरकार को 9 से 20 फीसदी तक सस्ते दाम पर लड़ाकू विमान मिल रहे हैं तो वह 126 की बजाए 36 विमान क्यों खरीद रही है। उन्होंने कहा, 'वित्त मंत्रालय का कहना है कि एनडीए द्वारा राफेल को लेकर जो बातचीत हुई उसमें उसे 9 से 20 प्रतिशत सस्ते विमान मिले हैं। यदि ऐसा है तो सरकार 126 की बजाए 36 विमान क्यों खरीद रही है?'

पूर्व वित्तमंत्री ने कहा, 'भारतीय वायुसेना का कहना है कि विमान की ताकत कम हो गई है और उसे कम से कम 7 स्कवाड्रन (126 विमान) की जरूरत है। तो सरकार क्यों केवल 2 स्कवाड्रन (36 विमान) खरीद रही है? राफेल 126 विमान बेचने को तैयार है। वित्त मंत्रालय के अनुसार दाम सस्ते हैं। तो क्यों 36 विमान खरीदे जा रहे हैं? क्या कोई कृपा करते इस गुत्थी को सुलझा सकता है?'

सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाते हुए चिदंबरम ने कहा, '126 विमानों की पेशकश के दौरान केवल 36 विमान खरीदकर सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करते हुए उसे खतरे में डाला है।' उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद राहुल गांधी ने कहा था उनकी पार्टी यह साबित करके रहेगी कि इस विमान सौदे में ‘चोरी’ हुई है। उन्होंने कहा था कि इस मामले पर शीर्ष अदालत में कैग रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है, जबकि ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है।
  

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