Skip to main content

3 कारण जिनसे भाजपा की लोकप्रियता हो रही कम और फीका पड़ रहा मोदी का जादू




5 विधानसभा चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट है कि बीजेपी के लोकप्रियता में कमी आई है। भाजपा में सिर्फ क्षेत्रीय नेतृत्व ही नहीं, अपितु केंद्रीय नेतृत्व के करिश्मे में भी कमी दिख रही है। 2013 विधानसभा चुनावों तथा 2014 के लोकसभा चुनावों को मापदंड बनाया जाए तो भाजपा के गिरते लोकप्रियता को आसानी से समझा जा सकता है। यही नहीं ये चुनाव परिणाम यह भी बताते चुनाव प्रचार में पहुंचने के बाद भी पीएम मोदी का जादू फीका पड़ रहा है। कुछ ऐसे कारण रहे हैं जिन्होंने भाजपा की लोकप्रियता और पीएम मोदी के जादू को कम कर दिया है।



पहला कारण-नोटबंदी
इन कारणों में नोटबंदी के विफलता को प्रथमत: रखा जाना चाहिए। नोटबंदी अपने किसी भी वांछित लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाई,न तो कालाधन की वापसी हुई और न ही अर्थव्यवस्था में नकदी तंत्र समाप्त हुआ। उल्टे आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में अर्थव्यवस्था में नकद व्यवस्था तंत्र पुनः मजबूत हुआ। लेकिन इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

अर्थव्यवस्था जब नोटबंदी से संघर्ष कर रही थी, तभी लगभग बिना किसी तैयारी के जीएसटी के क्रियान्वयन ने लघु उद्योगों की कमर तोड़ दी। इससे भारी मात्रा में मजदूर बेरोजगार होकर वापस अपने घर पहुंचे। सरकार ने सामाजिक क्षेत्र के कई योजनाओं में बजट कटौती की, जिसके चपेटे में मनरेगा भी आया। बेरोजगार होकर गांव आए मजदूरों को मनरेगा भी रोजगार देने में आत्मसात नहीं कर पाया। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी बैचेनी फैली तथा बीजेपी के प्रति नाराजगी में वृद्धि हुई। छत्तीसगढ़ में रमण सिंह ने मनरेगा के 100 दिन के रोजगार गारंटी के स्थान पर 150 दिन कर दिया था, परंतु केंद्र सरकार द्वारा बजट कटौती के कारण वे इसे क्रियान्वित नहीं कर पाए।



from News BaBa https://ift.tt/2SMWXLq
via IFTTT

Popular posts from this blog

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी 

  सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए मोदी सरकार के बिल के पास होने के बाद इसे संवैधानिक तौर से सोमवार को लागू कर दिया गया. सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में सोमवार शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई. इसके साथ ही सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिह्नित करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.’ संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन के साथ ही एक उपबंध जोड़ा गया है. इसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है. गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने...

BSP से गठबंधन के बाद बोले अखिलेश यादव- BJP नेता- कार्यकर्ता पस्त, 

साथ आने को बेचैन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके भारतीय जनता पार्टी पर अटैक किया. उन्होंने लिखा कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमारे गठबंधन के बाद बीजेपी का बूथ चकनाचूर हो गया है. अब बीजेपी के लोग सपा-बसपा में शामिल होना चाहते हैं. बता दें, शनिवार को सपा ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने लिखा, 'बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं. अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’. ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं.' बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर...

हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

    भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है। आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है। राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और के...