Skip to main content

राजस्थान में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा, गहलोत के पास वित्त-गृह, पायलट को PWD




राजस्थान में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों के विभागों का ऐलान कर दिया गया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पास वित्त मंत्रालय रखा है.


राजस्थान में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों के विभागों का ऐलान कर दिया गया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दोनों अहम गृह और वित्त मंत्रालय अपने पास रखा है. विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद 17 दिसंबर को अशोक गहलोत ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. उनके साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी उपमुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया.

राज्य के मंत्रियों के विभागों के बंटवारे के दौरान काफी सावधानी बरती गई है. मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने पास वित्त और गृह मंत्रालय समेत 9 मंत्रालय अपने पास रखा जबकि उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को लोक निर्माण, पंचायती राज, ग्रामीण विकास मंत्रालय और विज्ञान-तकनीकी समेत कुल 5 मंत्रालयों का जिम्मा सौंपा गया है. 24 दिसंबर को मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था जिसमें 13 कैबिनेट मंत्री और 10 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली थी, लेकिन अगले 3 दिन तक नएनवेले मंत्रियों के विभागों का ऐलान नहीं किया जा सका.

राजस्थान में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद 23 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई थी. लेकिन कहा जा रहा है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट- दोनों ही अपने-अपने कोटे के मंत्रियों को अच्छे मंत्रालय देने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं. इस कारण सहमति बनने में समय लग गया. विभागों के बंटवारे से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार शाम पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की. सूत्रों के मुताबिक गहलोत के अलावा पार्टी के राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी राहुल गांधी के आवास 12 तुगलक लेन पहुंचे.

बुलाकी दास कल्ला को उर्जा विभाग और भू-जल विभाग समेत 4 विभाग सौंपे गए हैं. जबकि शांति कुमार धारीवाल को संसदीय कार्य मंत्रालय समेत 3 विभाग दिए गए हैं.





from News BaBa http://bit.ly/2EXMJ7t
via IFTTT

Popular posts from this blog

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी 

  सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए मोदी सरकार के बिल के पास होने के बाद इसे संवैधानिक तौर से सोमवार को लागू कर दिया गया. सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में सोमवार शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई. इसके साथ ही सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिह्नित करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.’ संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन के साथ ही एक उपबंध जोड़ा गया है. इसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है. गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने...

BSP से गठबंधन के बाद बोले अखिलेश यादव- BJP नेता- कार्यकर्ता पस्त, 

साथ आने को बेचैन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके भारतीय जनता पार्टी पर अटैक किया. उन्होंने लिखा कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमारे गठबंधन के बाद बीजेपी का बूथ चकनाचूर हो गया है. अब बीजेपी के लोग सपा-बसपा में शामिल होना चाहते हैं. बता दें, शनिवार को सपा ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने लिखा, 'बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं. अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’. ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं.' बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर...

हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

    भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है। आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है। राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और के...