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BJP की वो फायरब्रांड साध्वी, जिन्हें कुंभनगरी में संतों ने दी महामंडलेश्वर की पदवी 



साध्वी निरंजन ज्योति को निरंजनी अखाड़े का महामंडेश्वर बनाया गया है. कुम्भ मेले के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने साध्वी निरंजन ज्योति को चादर ओढ़ाकर महामंडलेश्वर की पदवी दी.



साध्वी निरंजन ज्योति बीजेपी की फायर ब्रांड नेता मानी जाती हैं. संगठन और पार्टी में उन्होंने संतुलन साधा ही, अपनी साध्वी परंपरा को हमेशा कायम रखा. केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद आज भी वह कहती हैं कि उनके लिए राम मंदिर पहले है, मंत्रिपद बाद में. भारतीय जनता पार्टी में आने से पहले वह 1987 में विश्व हिंदू परिषद के संपर्क में आईं और राम मंदिर आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया. 

साध्वी निरंजन ज्योति को निरंजनी अखाड़े का महामंडेश्वर बनाया गया है. कुम्भ मेले के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने साध्वी निरंजन ज्योति को चादर ओढ़ाकर महामंडलेश्वर की पदवी दी. उनका पट्टाभिषेक किया गया. इसके बाद वह अखाड़े की 16वीं महिला महामंडलेश्वर बन गईं. बताया जा रहा है कि इस पद के लिए कई आवेदन आए थे, लेकिन अंतिम मुहर निरंजन ज्योति के नाम पर लगी. अब तक निरंजनी अखाड़े में संतोषी गिरि, संतोषानंद सरस्वती, मां अमृतामयी, योग शक्ति सहित 15 महिला महामंडलेश्वर बन चुकी हैं.

हमीरपुर उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव पत्योरा में एक मजदूर परिवार में 1 मार्च, 1967 को जन्मी साध्वी निरंजन ज्योति का झुकाव बचपन से ही आध्यात्म की तरफ था. 14 साल की अवस्था में ही वह स्वामी अच्युतानंद जी महाराज की शरण में आ गईं. साध्वी ने संन्यास की दीक्षा उन्हीं से ली. इसके बाद निरंजन ज्योति स्वामी परमानंद गिरी जी के संरक्षण में पूरे देश में धर्म की अलख जगाने निकल पड़ीं. पूरे देश का भ्रमण और धर्म का प्रचार-प्रसार में लगे होने के कारण औपचारिक शिक्षा पीछे रह गईं. निरंजन ज्योति केवल इंटर तक की पढ़ाई ही पूरी कर पाईं.

निरंजन ज्योति 1987 में विश्व हिंदू परिषद के संपर्क में आईं और पूरे देश में राम जन्म भूमि आंदोलन का प्रचार किया. ज्योति ने वनवासी गिरिवासी और गरीबों के लिए काम किया. ज्योति श्रीहरि सत्संग समिति की संरक्षिका भी रहीं. उन्होंने दुर्गा वाहिनी उत्तर प्रदेश के लिए भी काम किया. वह विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल के सदस्य के रूप में सक्रिय रहीं.

1990 में मंदिर आंदोलन उफान पर था. आडवाणी सोमनाथ से रथयात्रा लेकर निकल पड़े थे. इस दौरान पार्टी को ऐसे नेताओं की तलाश थी, जो राम मंदिर की बात मजबूती से रख सकें और उन्हें इसको लेकर कोई झिझक न हो. निरंजन ज्योति उसी दौरान बीजेपी में सक्रिय हुईं. उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से 2 बार विधानसभा का चुनाव लड़ीं और हार गईं. लेकिन 2012 में उन्होंने बाजी पलट दी और रिकॉर्ड वोटों से हमीरपुर से विधायक चुनी गईं. निरंजन ज्योति ने बीजेपी संगठन में कई अहम पदों पर काम किया. 2010-12 के दौरान वह बीजेपी की प्रदेश मंत्री भी रहीं.

उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष का दायित्व निभाते हुए 2014 में उन्हें फतेहपुर से सांसद का टिकट मिला और यहां भी उन्होंने रिकॉर्ड मतों से विजय हासिल की. पार्टी और संगठन में उनके योगदान को देखते हुए निरंजन को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्यमंत्री का पद दिया गया.

कौन होता है महामंडलेश्वर

संतों को पदवी देने की पुरानी परंपरा रही है. किसी संन्यासी को इस आधार पर महामंडलेश्वर की उपाधि दी जाती है कि वह कितना शिक्षित, कितना ज्ञानी, कितना संस्कारवान है. इसके साथ यह भी देखा जाता है कि उसका सामाजिक स्तर क्या है. महामंडलेश्वर की पदवी देने से पहले यह भी देखते हैं कि उसमें वैराग्य का भाव कितना है, घर और परिवार से कोई संबंध तो नहीं है. संस्कृत, वेद पुराण का कितना ज्ञान है, कथा प्रवचन में कितना पारंगत है.

महामंडलेश्वर की उपाधि या तो बचपन में दी जाती है या जीवन के चौथे चरण यानि वानप्रस्थ आश्रम में. अखाड़े परीक्षा भी ले सकते हैं. इसके बाद व्यक्ति को महामंडलेशवर का पद दिया जाता है. इससे बड़ा पद आचार्य महामंडलेश्वर का होता है. शाही जुलूस में आचार्य महामंडलेश्वर के पीछे महामंडलेश्वर का रथ चलता है. महामंडलेश्वर से अपेक्षा की जाती है 

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