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जानें कुंभाराम के बारे में, जिनके नाम के स्थान पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कुंंभकरण बोल दिया 





 



राजस्थान में दो दिन बाद विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी है. मतदाताओं को खुश करने के लिए पार्टी आलाकमान सूबे में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं, उन्हीं में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल हैं. मंगलवार को झुंझुनु में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी की जुबान फिसल गई और वो 'कुंभाराम' के स्थान पर 'कुंभकरण' बोल गए.

इस गलती के बाद सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का लगातार मजाक बनाया जा रहा है. साथ ही कुंभाराम का भी जिक्र हो रहा है, जिनके स्थान पर उन्होंने कुंभकरण बोला है. बता दें कि राहुल गांधी ने कुंभाराम लिफ्ट योजना को कुंभकरण लिफ्ट योजना कह दिया था. जानते हैं इस योजना के बारे में और आपको बताते हैं कि कुंभाराम कौन थे, जिनके नाम पर यह परियोजना है...

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कौन थे कुंभाराम?

कुंभाराम आर्य को राजस्थान में किसान वर्ग के लिए संघर्ष का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने राजस्थान के किसानों को राजशाही शोषण और उत्पीड़न के चक्रव्यूह से बाहर बाहर निकालने की मुहिम चलाई थी. 10 मई 1914 को जन्मे कुंभाराम राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानियों में भी प्रमुख थे और उन्हें आजादी की जंग में कई बार जेल भी जाना पड़ा था. किसानों के लिए संघर्ष करने के साथ ही वे राजनीतिक जगत में भी अहम पदों पर रहे.

राजनीति के क्षेत्र में उनकी छवि एक स्पष्टवादी नेता के रूप में रही. शुरुआत में उन्होंने बीकानेर रियासत की पुलिस में भी काम किया और राज्य के मंत्री तक रहे. उन्होंने किसान वर्ग को संगठित कर राजशाही और जागीरदारों के खिलाफ खुलकर आंदोलन का बिगुल बजाया, जिसका काफी असर हुआ. उसके बाद तत्कालीन महाराजा सादुल सिंह की बीकानेर रियासत में वो रेवेन्यू मिनिस्टर बने. हालांकि करीब 6 महीने बाद उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया.

कुंभकरण लिफ्ट योजना! राजस्थान में फिर फिसली राहुल की जुबान

राजस्थान के निर्माण के वक्त महाराजा सादुल सिंह की बीकानेर रियासत का  राजस्थान में विलय हो गया. लोकतंत्र आने के बाद भी उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास के साथ गृहमंत्री के रुप में काम किया. इसके आगामी चुनावों में भी उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई. कहा जाता है कि उन्होंने प्रदेश के कई मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई. उन्हें किसान हित के लिए किए गए कई कार्यों का श्रेय जाता है.

क्या है कुंभाराम लिफ्ट योजना परियोजना?

कुंभाराम परियोजना के माध्यम से प्रदेश के मलसीसर, खेतड़ी, झुंझुनू, सीकर के साथ-साथ करीब 1400 गांवों को पानी दिया जाना है. इसकी कुल लागत 588 करोड़ रुपये बताई जा रही है.



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