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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018: 30 सीटों पर खड़े ये बागी बनेंगे भाजपा या कांग्रेस की हार का कारण!





   




मध्यप्रदेश चुनाव को लेकर आए कई एग्जिट भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान लगा रहे हैं। अगर ये एग्जिट पोल सही साबित हुए तो दोनों ही पार्टियां कहीं न कहीं टिकट बंटवारे की प्रकिया को दोष देंगी।



ऐसा इसलिए क्योंकि टिकट ना मिलने से नाराज दोनों ही पार्टी के बागी नेताओं ने 30 सीटों पर आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ दूसरी पार्टी के टिकट पर या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकी।

दोनों ही पार्टियों ने बागियों को मनाने का प्रयास किया। कांग्रेस की ओर से जहां दिग्विजय सिंह तो भाजपा की ओर से खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन नेताओं को मानने और उम्मीदवारी वापस कराने के लिए मोर्चा संभाला।

पांच बार के सांसद और दो बार विधायक रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता रामकृष्ण कुसमरिया ने टिकट ना मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वित्त मंत्री जयंत मलैया के खिलाफ चुनाव लड़ा। वह भाजपा के वोट काट सकते हैं। इसी तरह कांग्रेस को भी झाबुआ में नुकसान हो सकता है जहां बागी जेवियर मेडा ने कांतिलाल भूरिया के बेटे जितेंद्र भूरिया के खिलाफ टिकट ना मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा।

भिंड विधायक नरेंद्र सिंह का टिकट जब भाजपा ने काटा तो वह समाजवादी पार्टी में शामिल होकर चुनावी मैदान में उतर गए। इसी तरह 2013 में ग्वालियर ग्रामीण से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने साहब सिंह गुर्जर ने बहुजन समाज पार्टी में शामिल होकर कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा।

इसी तरह विजयपुर, लहार, करैरा, नीमच, जावद, मल्हारगढ़, गरोठ, सुवासरा, मनासा, पुष्पराजगढ़, अनूपपुर, कोतमा, सिंहावल, नागौद, मुड़वारा, पनागर, जबलपुर, सागर, सतना, रतलाम, सैलाना, जावरा, सीहोर पर चुनाव लड़ रहे दोनों ही पार्टियों के बागी परिणाम पर असर डाल सकते हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव में 33 सीटों पर जीत-हार का अंतर केवल 1 फीसदी था। बहरहाल ये बागी अपनी पार्टी को कितना नुकसान पहुंचाते हैं इसका खुलासा 11 दिसंबर को परिणाम के साथ हो जाएगा।



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