Skip to main content

LIVE: मालदीव के राष्ट्रपति सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे PM मोदी







प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शपथग्रहण समारोह में शिरकत करने माले पहुंचे चुके हैं. कुछ ही देर में सोलिह का शपथग्रहण कार्यक्रम शुरू हो जाएगा. यह शपथग्रहण कार्यक्रम माले स्थित नेशनल स्टेडियम में आयोजित हो रहा है.



प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की मालदीव की यह पहली यात्रा है. आपको बता दें कि दक्षिण एशियाई देशों में मालदीव एकमात्र ऐसा देश है, जहां की यात्रा पीएम नरेंद्र मोदी ने साल 2014 के बाद नहीं की थी.


2015 में पीएम मोदी मालदीव की यात्रा करने वाले थे, लेकिन वहां पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशिद की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी. यात्रा से पहले मोदी ने कई ट्वीट कर कहा, "मैं श्री सोलिह की नयी मालदीव सरकार को उनकी विकास प्राथमिकताओं विशेषकर आधारभूत क्षेत्र, स्वास्थ्य देखभाल, सम्पर्क एवं मानव संसाधन विकास को साकार करने के लिए मिलकर काम करने की भारत सरकार की मंशा से अवगत कराऊंगा."

उन्होंने कहा कि मालदीव में हुए हालिया चुनाव लोकतंत्र, कानून का शासन एवं समृद्ध भविष्य के लिए लोगों की सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, "हम भारत की यह प्रबल मंशा है कि हम एक स्थिर, लोकतांत्रिक, समृद्ध और शांतिपूर्ण मालदीव गणतंत्र देखना चाहते हैं"  उन्होंने हाल के चुनाव में सोलिह को उनकी जीत के लिए बधाई दी और उनका कार्यकाल सर्वोत्तम रहने की कामना भी की. सोलिह के शपथ ग्रहण के लिए आए आमंत्रण को मोदी ने हाल में स्वीकार किया था.

पीएम मोदी शाम पांच बजे नेशनल स्टेडियम में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे. सवा 6 बजे राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह के साथ उनकी मीटिंग है. इसके बाद वे आज ही भारत के लिए रवाना हो जाएंगे.

बता दें कि सितंबर 2018 में मालदीव में हुए आम चुनाव में मालदिवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने उस समय के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को हरा दिया था. सोलिह के गठबंधन को 58 फीसदी वोट हासिल हुए थे.

कौन हैं इब्राहीम सोलिह

साल 1994 में पहली बार जीतकर संसद पहुंचे इब्राहीम मोहम्मद सोलिह की मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी बनाने में अहम भूमिका रही है. साथ ही 2003 से लेकर 2008 के बीच उन्होंने देश में राजनीतिक सुधारों के लिए आंदोलन भी चलाया था. इन्हीं के प्रयासों से देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान को मजबूती मिल सकी है. वो साल 2011 से MDP संसदीय समूह के नेता हैं.

भारत के साथ मजबूत संबंधों के हिमायती

इब्राहीम सोलिह भारत के साथ मजबूत संबंधों के हिमायती रहे हैं. उन्होंने हमेशा से भारत से अच्छे राजनीति और व्यापारिक रिश्तों की पैरवी की है. इब्राहिम सोलिह ने खुद इच्छा व्यक्त की थी कि उनके शपथ ग्रहण समारोह में भारत के पीएम मौजूद रहें.

यामीन के साथ कड़वे रिश्तों का दौर

हालांकि निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन का झुकाव चीन की ओर था. उनके कार्यकाल के दौरान यामीन ने भारतीय कंपनियों के ठेके रद्द कर दिये थे. यहां तक कि मालदीव ने वहां पर बचाव अभियान में लगे दो भारतीय हेलिकॉप्टर को भी वापस भेज दिया था. मालदीव में 45 दिनों तक लगी इमरजेंसी के दौरान भारतीय कामगारों के लिए नियमों को भी सख्त किया गया था.

मालदीव में चुनाव से पहले इसके भारत के साथ रिश्ते तब और भी तनावपूर्ण हो गए थे जब बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर कहा था कि अगर चुनाव में धांधली होती है तो भारत को मालदीव पर हमला कर देना चाहिए. इसी ट्वीट के बाद मालदीव ने भारत के उच्चायुक्त अखिलेश मिश्र को समन भी किया था. 

  

Popular posts from this blog

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी 

  सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए मोदी सरकार के बिल के पास होने के बाद इसे संवैधानिक तौर से सोमवार को लागू कर दिया गया. सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में सोमवार शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई. इसके साथ ही सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिह्नित करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.’ संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन के साथ ही एक उपबंध जोड़ा गया है. इसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है. गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने...

BSP से गठबंधन के बाद बोले अखिलेश यादव- BJP नेता- कार्यकर्ता पस्त, 

साथ आने को बेचैन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके भारतीय जनता पार्टी पर अटैक किया. उन्होंने लिखा कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमारे गठबंधन के बाद बीजेपी का बूथ चकनाचूर हो गया है. अब बीजेपी के लोग सपा-बसपा में शामिल होना चाहते हैं. बता दें, शनिवार को सपा ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने लिखा, 'बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं. अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’. ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं.' बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर...

हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

    भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है। आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है। राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और के...