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काशी की धर्म संसद को नाकाम करना भी था अयोध्या धर्म सभा का एजेंडा?






प्रयागराज 6 वर्षों के अंतराल के बाद महाकुंभ के लिए तैयार हो रहा है. इससे पहले अयोध्या से लेकर काशी तक धार्मिक गतिविधियां चरम पर हैं. फरवरी में महाकुंभ का समापन होने के साथ ही देश में राजनीति के सबसे बड़े कुंभ लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल बज उठेगा. आगामी चुनावों के कुछ अहम मुद्दों की रूपरेखा इन धर्म संसदों में परखी जा रही है. यहां बात बनी तो आगामी चुनावों के कुछ अहम एजेंडे इन धर्मसंसदों में तय कर दिए जाएंगे.

इस क्रम में काशी में रविवार को परम धर्म संसद की शुरुआत हुई. इस धर्म संसद में राम मंदिर की गूंज उठी. धर्माधीश ज्योतिष एवं शारदा द्वारिका पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने धर्म संसद की शुरुआत करते हुए कहा, "हम ये चाहते हैं कि आराध्य राम का मंदिर सबके साथ मिलकर बनाया जाए. हम किसी के साथ राग द्वेष से नहीं बल्कि श्रद्धा के द्वारा मंदिर बनाना चाहते हैं."

इस धर्म सभा से इतर नजदीक ही अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने भी एक धर्म संसद का आयोजन रविवार को किया. इस आयोजन से पहले वीएचपी ने दावा किया था कि धर्म सभा में लाखों की संख्या में लोग शामिल होंगे और यह सभा राम मंदिर के निर्माण में निर्णायक नतीजे लेकर आएगी. हालांकि ये दावे जमीनी हकीकत पर खरे उतरते नहीं दिख रहे हैं. बीबीसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वीएचपी का लाखों का दावा महज हजारों में सिमटता दिख रहा है.

काशी में बैठे शंकराचार्य ने अयोध्या की धर्म सभा पर निशाना साधते हुए कहा, "अयोध्या की धर्मसभा राजनीतिक है. ये स्मारक बनाना चाहते हैं और हम उपासना गृह. हम मुस्लिम विरोध के आधार पर नहीं खड़े हुए हैं. अयोध्या में धर्म सभा करने वाले राजनीतिक लोग हैं. कोई भी राजनीतिक पार्टी मंदिर बनाने की हैसियत में तब आएगी जब सत्तारूढ़ हो जाएगी लेकिन उसे ये शपथ लेनी पड़ेगी की हम धर्म निरपेक्ष रहेंगे. ऐसे में सत्ता में बैठे लोग मंदिर-मस्जिद बना ही नहीं सकते. हम लोगों ने कोर्ट में यह बात सिद्ध कर रखी है कि यह राम जन्मभूमि है. मामला सुप्रीम कोर्ट में अभी अटका है. एक दिन मिल बैठकर विचार कर लें तो मंदिर बन जाएगा."

गौरतलब है कि अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद ने धर्म सभा आयोजित करते हुए केन्द्र में नरेन्द्र मोदी सरकार से अपील की है कि सरकार अयोध्या में जल्द से जल्द मंदिर निर्माण शुरू करने के लिए अध्यादेश लेकर आए. वहीं इसी धर्म सभा में शरीक हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर जल्द मंदिर का निर्माण नहीं किया गया तो बीजेपी सत्ता से बाहर हो जाएगी.

काशी में आयोजित धर्म संसद के लिए देशभर से सनातन धर्म को जीने व समस्याओं का अनुभव करने वाले 543 प्रतिनिधि बनाए गए हैं. इस संसद में इनके अलावा सनातन धर्म के 281 संतों, नेताओं और विद्वानों और अनेक धार्मिक संस्थाओं के 184 प्रतिनिधियों ने शिरकत की है. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण इस धर्म संसद का अहम एजेंडा है. संसद के पहले दिन और दूसरे दिन राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ करने पर अहम चर्चा की गई.

रविवार को ही अयोध्या और काशी में धर्म संसद और धर्म सभा से सवाल खड़ा हो रहा है. आखिर क्यों काशी में आयोजित एक विस्तृत धर्म संसद के साथ-साथ वीएचपी की धर्म सभा का अयोध्या में आयोजन किया गया? जब दोनों में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा अहम है तो क्या दोनों सम्मेलनों का राम मंदिर निर्माण का रास्ता अलग-अलग है? इन सवालों का जवाब साफ नहीं होने पर गंभीर सवाल यह खड़ा होता है कि क्या अयोध्या की धर्म सभा इसलिए आयोजित की गई जिससे काशी की धर्म संसद को विफल किया जा सके.

  

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