Skip to main content

टिकट बंटवारे को लेकर अब राहुल गांधी के सामने भिड़े पायलट और रामेश्वर डूडी









राजस्थान विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों की दावेदारी को लेकर नेताओं को बीच कलह सतह पर आ गई है. खबर है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और विधायक दल के नेता रामेश्वर डूडी आपस में भिड़ गए जहां दोनों के बीच तीखी कहासुनी भी हुई.

राहुल गांधी की मौजूदगी में सोमवार रात को राजस्थान के उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने के लिए कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई थी. इस बैठक में अपने-अपने उम्मीदवारों को टिकट दिलाने के लिये सचिन पायलट और रामेश्वर डूडी के बीच कहासुनी हो गई. दोनों नेताओं के बीच विवाद बढ़ता देख इसे सुलझाने के लिए राहुल गांधी ने दोनों नेताओं से उम्मीदवारों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी. सूत्रों के मुताबिक, सचिन और डूडी की खुली जंग से राहुल गांधी के चेहरे पर गुस्सा साफ देखा जा सकता था.

सूत्रों के मुताबिक, डूडी को अशोक गहलोत का करीबी माना जाता है. इस लिहाज से विवाद को सचिन पायलट और गहलोत के बीच सियासी जंग के तौर पर देखा जा रहा है. सभी नेताओं को इस विवाद पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया गया है. अगर मामला नहीं निपटा तो राहुल गांधी मध्य प्रदेश की तर्ज पर कमेटी भी बना सकते हैं. खबर हैं कि फुलेरा, किशनगढ़, चित्तौड़गढ़,  गंगानगर और फलौदी की सीटों को लेकर यह विवाद हुआ है.

राजस्थान में कांग्रेस ने अभी तक उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं की है. बीते करीब एक हफ्ते से लगातार पार्टी ओर लिस्ट जारी किए जाने का इंतजार हो रहा है लेकिन किसी न किसी वजह से उम्मीदवारों का एलान टल रहा है. राजस्थान में 7 दिसबंर को चुनाव है जबकि वोटों की गिनती 11 दिसंबर को होनी है.

पहले भिड़े थे MP के नेता

राजस्थान से पहले मध्य प्रदेश चुनाव के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट फाइनल करते समय केंद्रीय चुनाव समिति के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच तीखी कहासुनी हो गई थी. यह बैठक राहुल गांधी की मौजूदगी में मध्य प्रदेश के उम्मीदवारों की लिस्ट को अंतिम रूप देने के लिए बुलाई गई थी.

दोनों के बीच जब बात नहीं बनी तो विवाद सुलझाने के लिए राहुल गांधी को तीन सदस्यीय समिति बनानी पड़ी. तीन सदस्यीय समिति के सदस्य अशोक गहलोत, वीरप्पा मोइली और अहमद पटेल ने पार्टी के वॉर रूम 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर बैठक भी की थी. हालांकि बाद में दोनों वरिष्ठ नेताओं ने कहासुनी की बात से इनकार कर दिया था.

  

Popular posts from this blog

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी 

  सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए मोदी सरकार के बिल के पास होने के बाद इसे संवैधानिक तौर से सोमवार को लागू कर दिया गया. सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में सोमवार शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई. इसके साथ ही सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिह्नित करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.’ संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन के साथ ही एक उपबंध जोड़ा गया है. इसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है. गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने...

BSP से गठबंधन के बाद बोले अखिलेश यादव- BJP नेता- कार्यकर्ता पस्त, 

साथ आने को बेचैन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके भारतीय जनता पार्टी पर अटैक किया. उन्होंने लिखा कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमारे गठबंधन के बाद बीजेपी का बूथ चकनाचूर हो गया है. अब बीजेपी के लोग सपा-बसपा में शामिल होना चाहते हैं. बता दें, शनिवार को सपा ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने लिखा, 'बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं. अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’. ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं.' बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर...

हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

    भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है। आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है। राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और के...