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राजस्थान चुनावः कांग्रेस के लिए सिरदर्द बने अल्पसंख्यक उम्मीदवार









मरुधरा राजस्थान का चुनावी संग्राम अपने अंजाम तक पहुंच गया है. कांग्रेस ने जहां 15 मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर संतुलन बनाने की कोशिश की है, वहीं बीजेपी ने अपना कोटा घटाते हुए महज एक मुस्लिम को टिकट दिया है. लेकिन मुस्लिम बाहुल्य कांग्रेस की परंपरागत सीटों पर बड़ी संख्या में निर्दलीय या दूसरी पार्टियों के टिकट पर भी मुस्लिम उम्मीदवार उतर गए हैं, जिससे कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है.

200 विधानसभा सीट वाली राजस्थान विधानसभा की 16 सीटें ऐसी हैं, जो अल्पसंख्यक बाहुल्य हैं और इन क्षेत्रों से परंपरागत तौर पर कांग्रेस को समर्थन मिलता रहा है. कांग्रेस ने इस बार भी इनमें से ज्यादातर सीटों पर अपने मुस्लिम चेहरों को मैदान में उतारा है. लेकिन दूसरी तरफ इन सीटों से बड़ी संख्या में ऐसे मुस्लिम उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं, जो या तो निर्दलीय हैं या कांग्रेस-बीजेपी के अलावा किसी दूसरे दल से जुड़े हैं. ऐसे में सत्ता वापसी के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस के लिए ये उम्मीदवार मुश्किल का सबब बन गए हैं.

16 सीटों पर 125 अल्पसंख्यक उम्मीदवार

मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर 16 सीटों पर दंभ भरने वाले कुल 382 उम्मीदवारों में से 125 अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं. 2013 विधानसभा चुनाव की बात की जाए इन सीटों पर 80 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से कई ने कांग्रेस उम्मीदवारों के पासे पलट दिए.

2013 विधानसभा चुनाव में क्या रहा गणित

पिछले चुनाव की बात की जाए तो इन सीटों पर 80 उम्मीदवार ऐसे थे, जो अल्पसंख्यक समुदाय से आते थे. इनमें सबसे ज्यादा किशनपोल और आदर्शनगर सीट पर 17 उम्मीदवार थे. जबकि कामां पर 11 और तिजारा सीट पर 6 मुस्लिम उम्मीदवार थे. भरतपुर की कामां सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी जाहिदा खान बीजेपी के जगत सिंह से 3357 वोटों के अंतर से हारी थीं. जबकि इसी सीट पर दूसरे 10 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को 8207 वोट मिले थे.

ऐसे ही कुछ नतीजे आदर्शनगर में देखने को मिले थे, जहां स्वर्गीय माहिर आजाद बीजेपी उम्मीदवार अशोक परनामी से 3803 वोटों के अंतर से हारे थे. जबकि इस सीट पर दूसरे अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को 4556 वोट मिले थे.

तिजारा और रामगढ़ में भी बिगड़ा था खेल

अलवर जिले की तिजारा और रामगढ़ सीट पर भी कांग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवार कम अंतर से हारे थे. तिजारा सीट पर एमामुद्दीन अहमद खान तीसरे नंबर पर रहे थे, जबकि दूसरे नंबर पर कांग्रेस के बागी फजल हुसैन रहे थे और बीजेपी प्रत्याशी ममन सिंह यादव ने बाजी मारी थी. ममन सिंह को 69278 वोट मिले थे, जबकि फजल हुसैन को 31284 और एमामुद्दीन खान को 29172 वोट मिले थे.

इसी तरह रामगढ़ सीट बीजेपी के ज्ञानदेव आहूजा ने कांग्रेस उम्मीदवार जुबैर खान को 4647 मतों से हराया था, जबकि दूसरे अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को कुल करीब आठ हजार मत मिले थे. इस बार रामगढ़ सीट से जुबैर खान की पत्नी को मौका दिया गया है. टोंक सीट पर भी ऐसे ही नतीजे देखने को मिले थे. यहां से बीजेपी उम्मीदवार ने 30343 मतों से जीत हासिल की थी, जबकि दूसरे नंबर पर कांग्रेस के बागी सउद सईदी रहे थे, जो निर्दलीय चुनाव लड़े थे और कांग्रेस प्रत्याशी जाकिया को 21645 वोट मिले थे, जो तीसरे नंबर पर थीं. बाकी अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को भी करीब ढाई हजार वोट मिले थे.

इन सीटों पर उतारे कांग्रेस ने उम्मीदवार

मौजूदा चुनाव में कांग्रेस ने चुरू, फतेहपुर, किशनपोल, आदर्शनगर, सवाई माधोपुर, पुष्कर, नागौर, मकराना, पोकरण, शिव, रामगढ़, कामां, सूरसागर, लाडपुरा और तिजारा सीट से मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं. इन सीटों पर पिछली बार कांग्रेस के टिकट पर एक भी उम्मीदवार को जीत नहीं मिली थी. हबीबुर्रहमान के रूप में बीजेपी के टिकट पर नागौर से इकलौते मुस्लिम ने बाजी मारी थी. इस बार हबीबुर्रहमान को कांग्रेस ने टिकट दिया है. ऐसे में फिर एक बार नजर इस बात है कि कहीं अल्पसंख्यक उम्मीदवारों की अधिक संख्या खेल न बिगाड़ दे.

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