Skip to main content

दीया कुमारी की सफाई- वसुंधरा से पहले मामला बिगड़ा था,अब सब ठीक









जयपुर की पूर्व राजकुमारी और बीजेपी की सवाई माधोपुर विधायक दीया कुमारी ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से अपने संबंधों को लेकर कहा कि कुछ अधिकारियों की वजह से मामला बिगड़ा था लेकिन अब सब कुछ ठीक हो गया है.

राजपूतों की नाराजगी की बड़ी वजह जयपुर राजघराने की राजमहल की जमीन पर वसुंधरा सरकार के जबरन कब्जे की भी थी. तंवर राजपूत समाज ने राजघराने के साथ जयपुर की सड़कों पर उतर कर बड़ा आंदोलन किया था. उसके बाद से लगातार दीया कुमारी और वसुंधरा के संबंधों में कड़वाहट देखी गई थी. हालांकि दीया कुमारी ने साफ कर दिया है कि वसुंधरा राजे उन्हें राजनीति में लेकर आई थीं और वही राजनीति में उनकी गॉडफादर रही हैं. दीया कुमारी ने कहा, 'मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर जनता में एक परसेप्शन बना दिया गया है कि पार्टी तो ठीक है मुख्यमंत्री ही खराब है लेकिन ऐसा नहीं है. वसुंधरा सरकार ने पिछले 5 साल में बहुत काम किया है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि राजस्थान में बीजेपी की सरकार बनेगी.'

दीया कुमारी ने कहा कि उनके चुनाव लड़ने को लेकर बीजेपी जो भी फैसला करेगी, उसे मानेंगी. हालांकि इशारों-इशारों में साफ कर दिया कि वह बीजेपी की राजनीति में किसी बड़े रोल की तलाश में हैं और विधायक की सीट तक सीमित नहीं रहना चाहती हैं. माना जा रहा है कि दीया कुमारी जयपुर से अगला लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं. ऐसे समय में जब बीजेपी से राजपूत बड़ी संख्या में नाराज हैं, तो बीजेपी में दीया कुमारी का रोल बेहद अहम समझा जा रहा है. यही वजह है कि दीया कुमारी ने स्पष्ट कर दिया कि राजपूतों की जो कुछ नाराजगी थी उसे ठीक कर लिया गया है. उनका मानना है कि राजपूत समाज शुरू से बीजेपी के साथ रहा है और बीजेपी के साथ ही रहेगा.

दीया ने कहा कि 'राजस्थान में रजवाड़ा के लिए आम जनता के मन में काफी सम्मान है जिसकी वजह से जब भी वह चुनाव में जाती हैं तो जीत जाती हैं.' अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि 'जयपुर का राजवाड़ा जनता के लिए काफी भलाई का काम किया है यही वजह है कि पहली बार जब वह राजमहल से जनता के बीच पहुंचीं तो लोगों ने इतना प्यार दिया कि अपना घर जैसा लगा. उनके पिता भवानी सिंह कांग्रेस के टिकट पर जयपुर से और दादी गायत्री देवी स्वतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ चुकी हैं. वसुंधरा राजे के आग्रह पर बीजेपी को चुना और अब बीजेपी में ही पार्टी की सेवा करना चाहती हूं.'

  

Popular posts from this blog

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी 

  सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए मोदी सरकार के बिल के पास होने के बाद इसे संवैधानिक तौर से सोमवार को लागू कर दिया गया. सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में सोमवार शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई. इसके साथ ही सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिह्नित करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.’ संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन के साथ ही एक उपबंध जोड़ा गया है. इसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है. गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने...

BSP से गठबंधन के बाद बोले अखिलेश यादव- BJP नेता- कार्यकर्ता पस्त, 

साथ आने को बेचैन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके भारतीय जनता पार्टी पर अटैक किया. उन्होंने लिखा कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमारे गठबंधन के बाद बीजेपी का बूथ चकनाचूर हो गया है. अब बीजेपी के लोग सपा-बसपा में शामिल होना चाहते हैं. बता दें, शनिवार को सपा ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने लिखा, 'बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं. अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’. ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं.' बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर...

हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

    भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है। आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है। राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और के...