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अंडमान- निकोबार का नाम ‘शहीद और स्वराज’ द्वीपसमूह करने की मांग









उत्तर प्रदेश सरकार ने जब से फैजाबाद जिले का नाम बदल कर अयोध्या रखा है, ऐसे ही और जगहों के नाम बदलने की मांगों की बाढ़ सी आ गई है. ऐसी ही ताजा मांग नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार के सदस्य और बंगाल बीजेपी के उपाध्यक्ष चंद्र कुमार बोस ने की है. बोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी चिट्ठी में कहा है कि नेताजी को श्रद्धांजलि देने के लिए अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का नाम बदल कर शहीद और स्वराज द्वीपसमूह किया जाना चाहिए.

बोस के मुताबिक ‘यूनाइटेड फ्री भारत’ के पहले पीएम होने के नाते नेता जी ने 30 दिसंबर 1943 को पोर्ट ब्लेयर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में आजाद हिंद सरकार की स्थापना की थी और इस द्वीपसमूह का नाम बदलकर भी शहीद और स्वराज द्वीपसमूह कर दिया था.

चंद्र कुमार बोस ने 11 नवंबर को लिखी अपनी चिट्ठी में कहा है, ‘आजाद हिंद सरकार के प्रमुख नेताजी ने राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर अपने वादे को पूरा किया कि 1943 के अंत तक भारतीय जमीन पर आजाद हिंद फौज (INA) खड़ी होगी.’ बोस ने चिट्ठी में लिखा, ‘29 दिसंबर 1943 को नेताजी अंडमान में पोर्ट ब्लेयर एययपोर्ट पर आनंद मोहन सहाय, कैप्टन रावत-एडीसी और नेताजी के निजी फिजीशियन कर्नल डीएस राजू के साथ उतरे. वहां उत्साह से भरे भारतीय नागरिकों ने उनका जोरदार स्वागत किया. नेताजी ने इंडियन नेशनल आर्मी के जनरल ए जी लोगानाथन को द्वीपसमूह का गवर्नर नियुक्त किया.’ 



 

बोस ने ये मांग ऐसे वक्त पर की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिसंबर में नेताजी की ऐतिहासिक यात्रा की 75वीं सालगिरह पर द्वीपसमूह पर आने का कार्यक्रम है.

यह भी पढ़ें: फैजाबाद का नाम बदला, अब मीट और शराब की बिक्री पर भी लग सकता है बैन

 

बोस ने पीएम को लिखा है, ‘भारत 30 दिसंबर 2018 को नेताजी की ओर से किए गए ध्वजारोहण की 75वीं सालगिरह मनाने जा रहा है. ये जानना बड़ा सुखद है कि आप पोर्ट ब्लेयर के जिमखाना ग्राउंड्स पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं. हमारे महान देश के लोगों की ओर से मांग है कि भारत सरकार अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का नाम बदल कर शहीद और स्वराज द्वीपसमूह कर दिया जाना चाहिए, जैसा कि नेताजी ने रखा था. ये लोगों की मांग रही है और नेताजी को जनवरी में उनकी जयंती से पहले ऐसा किए जाना उन्हें सबसे सही श्रद्धांजलि होगा. हमें पूरी उम्मीद है कि पीएम हमारी मांग को सुनेंगे और अंडमान की अगले महीने यात्रा के दौरान नाम बदलने का एलान करेंगे. ये आजाद हिंद फौज के योगदान को मान्यता देना होगा.’

  

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