Skip to main content

BJP के खिलाफ वैचारिक बहस छेड़ेगी कांग्रेस, कई दिग्गज होंगे शामिल









'क्या भारत को फिर से परिभाषित किया जा रहा है?' इस टैगलाइन को केंद्र में रखकर कांग्रेस देश भर में एक वैचारिक बहस छेड़ने की रणनीति को अमली जामा पहनाने जा रही है. इसकी शुरुआत 30 नवंबर को राजधानी दिल्ली से होगी, जिसमें पी. चिदंबरम, कपिल सिब्बल, रणदीप सुरजेवाला, सलमान खुर्शीद, अभिषेक मनु सिंघवी सरीखे दिग्गज हिस्सा लेंगे. इसके बाद देश भर में इस मुद्दे को ले जाने की तैयारी है.

कांग्रेस मध्यम वर्ग, युवा वर्ग और प्रोफेशनल्स को अपने साथ जोड़ने के लिए इस बहस को देश भर में पहुंचाना चाह रही है. पार्टी को 5 बड़े मुद्दे दिखते हैं, जिससे वो मानती है कि बीजेपी या उसके करीबी संगठन और सरकार देश को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं. ये पांच मुद्दे हैं- हर मुद्दे को धर्म से जोड़ा जाना. सुप्रीम कोर्ट, सीवीसी, चुनाव आयोग, सीबीआई जैसे संस्थानों को कमजोर किया जाना. प्रोग्रेसिव सोच के बजाय रीग्रेसिव सोच के साथ चलने की नीति. भारत के विविधता में एकता के सिद्धांत को दरकिनार करना. अंतिम पांचवें मुद्दे में कांग्रेस मानती है कि दुनिया में औद्योगिक क्रांति, ग्लोबल वार्मिंग और नौजवानों की नौकरियों के मुद्दे पर बहस है जबकि भारत में यह नदारद है.

कांग्रेस को लगता है कि इस बहस को छेड़कर माहौल बदला जा सकता है, इसलिए अलग अलग क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स को भी इसमें बुलाया जा रहा है. साथ ही रघुराम राजन, प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा सरीखे लोगों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. साथ ही ऐसे प्रोफेशनल्स जो कांग्रेस समर्थक नहीं हैं लेकिन वर्तमान सोच के खिलाफ हैं, उनको भी जोड़ा जाएगा.

इसी के तहत जल्द ही मुंबई में बिजनेस जगत के साथ, चेन्नई में डॉक्टर्स के साथ, लखनऊ में चार्टर्ड अकाउंटेंटस के साथ, जमशेदपुर में स्मॉल स्केल इंडस्ट्री के साथ प्रोफेशनल्स कांग्रेस सेमिनार आयोजित करेगी. 2019 के चुनाव के लिहाज से पार्टी इसे एक बड़ा कदम मान रही है. ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस के सलमान सोज और अमिता सिंह ने बताया कि बड़े स्तर से लेकर छोटे स्तर तक हम इस बहस को ले जाएंगे और यकीन है कि पार्टी इसमें कामयाब होगी.

  

Popular posts from this blog

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी 

  सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए मोदी सरकार के बिल के पास होने के बाद इसे संवैधानिक तौर से सोमवार को लागू कर दिया गया. सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में सोमवार शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई. इसके साथ ही सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिह्नित करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.’ संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन के साथ ही एक उपबंध जोड़ा गया है. इसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है. गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने...

BSP से गठबंधन के बाद बोले अखिलेश यादव- BJP नेता- कार्यकर्ता पस्त, 

साथ आने को बेचैन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके भारतीय जनता पार्टी पर अटैक किया. उन्होंने लिखा कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमारे गठबंधन के बाद बीजेपी का बूथ चकनाचूर हो गया है. अब बीजेपी के लोग सपा-बसपा में शामिल होना चाहते हैं. बता दें, शनिवार को सपा ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने लिखा, 'बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं. अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’. ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं.' बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर...

हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

    भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है। आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है। राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और के...