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अंबेडकर की जन्मस्थली जाकर सियासी गणित साधेंगे राहुल गांधी












बाबा साहेब डा.भीमराव अंबेडकर की जन्मभूमि महू दलित वोटों को साधने का एक बड़ा राजनीतिक केंद्र बन चुका है. पिछले तीन दशक से चुनावी जंग फतह करने के मकसद से बड़े नेता महू का रुख करते आ रहे हैं. राजीव गांधी, कांशीराम, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मायावती और नरेंद्र मोदी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को महू पहुंच रहे हैं. 

राहुल गांधी के मध्यप्रदेश दौरे के दूसरे दिन मंगलवार को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर श्रद्धाजंलि देने के बाद वह महू में ही एक रैली को भी संबोधित करेंगे. माना जा रहा है कि अंबेडकर के जन्मस्थली महू से राहुल दो सियासी समीकरण साधने की कवायद करेंगे.

दरअसल अंबेडकर के जन्मस्थली के चलते महू दलित अस्मिता का केंद्र बन चुका है. प्रदेश में दलित और आदिवासी मतदाताओं की अहम भूमिका है. यही वजह है कि हर बड़ा नेता इस मंच से देशभर के दलितों के दिल जीतने की कोशिश करने की कोशिश करता है.

कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल पहली बार महू पहुंचेगे. हालांकि साढ़े तीन साल पहले भी वे यहां आ चुके हैं. विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी नजर मध्य प्रदेश दलित और आदिवासी वोटों पर है.  ये दोनों समुदाय अंबेडकर को अपना मसीहा के रूप में मानते हैं.

मध्य प्रदेश में तकरीबन 15 फीसदी दलित मतदाता हैं. प्रदेश की कुल 230 सीटों में से दलित समुदाय के लिए 35 सीटें आरक्षित हैं. इसमें से 29 पर बीजेपी काबिज है. महू में ही करीब तीस हजार दलित मतदाता हैं. दलितों को साधने के लिए कांग्रेस बसपा के साथ गठबंधन की कोशिश कर रही थी, लेकिन मायावती ने साफ मना कर दिया है. इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी महू के जरिए दलितों के दिल में जगह बनाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा.

मध्य प्रदेश में आदिवासियों की आबादी 21 प्रतिशत से अधिक है. राज्य में 47 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं. इसके अलावा करीब 30 सीटें ऐसी मानी जाती हैं, जहां पर्याप्त संख्या में आदिवासी आबादी है. 2013 के विधानसभा चुनाव में आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीटों में से बीजेपी को 32 और कांग्रेस को15 सीटें मिली थीं.

बता दें कि अस्सी के दशक के अंत में अंबेडकर मूवमेंट जोर पकड़ने लगा था. इसके बाद यहां सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से आंबेडकर अनुयायियों के आने का यहां सिलसिला शुरू हुआ, फिर देश के दूसरे राज्यों से आने लगे.  90 का दशक आते-आते महू पूरी तरह बाबा साहेब की जन्मस्थली के रूप में अपनी पहचान बना लिया था. ये वही समय था जब कांशीराम ने बीएस-4 का गठन किया था.

मध्य प्रदेश में बीजेपी की सुंदर लाल पटवा की सरकार थी. 1991 का लोकसभा चुनाव के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, कांशीराम, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, मायावती महू आए थे. इसके बाद प्रदेश की सत्ता पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह काबिज हुए तो यहां नेताओं के आने का सिलसिला और भी तेज हो गया.

बता दें कि 2008 में लालकृष्ण आडवाणी ने अंबेडकर स्मारक का लोकार्पण किया था. इसके अलावा 2013 में अंबेडकर स्मारक में पांच प्रतिमाओं का अनावरण हुआ . इसके बाद 2 जून 2015 को राहुल गांधी और अंबेडकर जयंती 14 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 14 अप्रैल 2018 को राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद यहां आए थे.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसी महीने 22 अक्टूबर को जन आशीर्वाद यात्रा के बाद अंबेडकर स्मारक पहुंचे थे. इसी दिन पटेल नेता हार्दिक पटेल भी मालवा में किसान रैली से पहले महू के अंबेडकर स्मारक पर जाकर माथा टेका था.

  

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