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वाराणसी: आधी रात योगी ने मौके पर जाकर लिया 'विकास' का जायजा









उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कई परियोजनाओं का निरीक्षण किया. अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान रविवार रात को योगी कचहरी सर्किट हाउस से वाराणसी- बाबतपुर रिंग रोड संदहा पहुंचे. यहा उन्होंने रिंग रोड का निरीक्षण किया और फिर रामनगर निर्माणाधीन बंदरगाह पहुंच कर उसका निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को जरूरी दिशा- निर्देश भी दिया.

रात्रि भ्रमण के दौरान मीडिया से बात करते हुए सीएम योगी ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा देश का पहला मल्टी मॉडल हब इनलैंड वॉटर-वे के काशी को दिया जा रहा है. यह अपने आप में एक अद्भुत कार्य है. सैकड़ों वर्षों से जिस कार्य की तलाश थी, जिस बात को लेकर लोग उत्सुक थे कि क्या जल मार्ग से भी हम यातायात की सुविधा को या माल परिवहन की व्यवस्था को और सुगम बना सकते हैं, वो अब पूरी होने जा रही है. प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृष्टि के कारण यह काशी में ऐसा होने जा रहा है. यानी काशी अब केवल सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी ही नहीं होगी, बल्कि हर प्रकार के यातायात के लिए भी होगी.

उन्होंने कहा कि पहले काशी में आपने फोर लेन, सिक्स लेन, एयरप्लेन के मार्गों का निर्माण हो चुका है और वो साकार रूप ले चुके हैं और जलमार्ग की बात करें तो अब देश के पहले अत्याधुनिक जलमार्ग की सुविधा काशी से शुरू हो रही है. उन्होंने कहा कि हल्दिया (पश्चिम बंगाल) से काशी तक 14 किलोमीटर की यह दूरी सड़क मार्ग, रेल मार्ग और वायु मार्ग की तुलना में कम दाम पर यह सुविधा यहां प्राप्त होगी, इसे नवंबर के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा.

जल मार्ग से होगी धन और समय की बचत

1 महीने में 100000 टन से अधिक की ढुलाई काशी से हल्दिया तक और कोलकाता से वाराणसी तक की जा सकती है. परिवहन के आवागमन की सुविधा मिलेगी, माल भाड़े में कमी आएगी, यहां के किसानों और व्यापारियों के सामान को यहां से कोलकाता के माध्यम से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी खासतौर पर दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में पहुंचाने में. जिन चीजों को यहां की आवश्यकता है वहां से यहां तक के पहुंचाने में आसानी हो जाएगी. इससे तेल और समय और पैसे की बचत होगी. साथ- साथ हम लोग प्रदूषण को भी नियंत्रण करने में सफल होंगे. उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि नवंबर के अंत तक इसे राष्ट्र को समर्पित करने में मदद मिलेगी.

  

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