Skip to main content

चुनाव के दौरान कौन तय करता है पेट्रोल-डीजल की कीमतें?





पेट्रोल की आसमान छूती कीमतें इस साल लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं. विपक्षी पार्टियां और आम लोगों के विरोध जताने से सरकार चिंतित है. ऐसे में वित्त मंत्रीअरुण जेटली ने 4 अक्टूबर को एक्साइज ड्यूटी में डेढ़ रुपए की कटौती और मार्केटिंग कंपनियों ने एक रुपए की कटौती का ऐलान किया. इससे नागरिकों को ढाई रुपए की थोड़ी राहत मिली. केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से भी अपील में कहा कि वो भी वैट ढाई रुपए घटाए जिससे लोगों को कम से कम 5 रूपए कटौती का लाभ मिल सके.

इस कटौती से एक महीना पहले 2 सितंबर को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतें बढ़ने के लिए बाहरी कारणों को जिम्मेदार ठहराया था. क्या प्रधान का ये कथन सही था?  अगर ऐसा था तो कैसे एक महीने बाद ही वित्त मंत्री जेटली ने ढाई रुपए की कटौती की और कई राज्यों में कुल 5 रुपए की कटौती को सुनिश्चित किया?

थोड़ी राहत देकर लोगों की नाराजगी कम करने की कोशिश

पेट्रोलियम मंत्री बाहरी कारणों को जिम्मेदार बताने के अपने बयान में आंशिक रूप से सही थे. क्योंकि कच्चे तेल (क्रूड) की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें पेट्रोलियम पदार्थों की घरेलू कीमतें तय करने में कुछ हद तक भूमिका निभाती हैं. लेकिन न तो पेट्रोलियम मंत्री और न ही वित्त मंत्री ने ये जिक्र किया कि मई 2014 से मोदी सरकार केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी में 12 गुणा बढ़ोतरी कर चुकी है. इन 4  साल में एक्साइज ड्यूटी पेट्रोल पर 211% और डीजल पर 443% बढ़ चुकी है.  राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने थोड़ी राहत देकर लोगों की नाराजगी कम करने की कोशिश की. ऐसा करने में कोई ‘बाहरी कारण’ रुकावट नहीं बना.

 चुनावों में दी जाती है राहत

ये पहली बार नहीं था कि जब सरकार ने अपनी ओर से पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को लेकर लोगों को राहत देने की कोशिश की. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान भी ये देखा गया था कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को लगातार 20 दिन तक (24 अप्रैल से 14 मई 2018 तक) उतार-चढ़ाव से अलग रखा गया था. इसी तरह गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान भी 13 दिन तक (1 दिसंबर से 14 दिसंबर तक) पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को बदलाव से अलग रखा गया.

पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें क‍िस तरह होतीं है तय

सूचना के अधिकार (RTI) का इस्तेमाल  करते हुए इंडिया टुडे ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से जानना चाहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें किस तरह तय की जाती हैं? ये भी जानकारी मांगी गई कि कच्चे तेल (क्रूड), पेट्रोल-डीजल की कीमतें 24 अप्रैल से 14 मई 2018 और फिर 1 दिसंबर से 14 दिसंबर 2017 के बीच क्या थीं?



कच्चे तेल (क्रूड) और पेट्रोल-डीजल की कीमतों का हवाला दिया गया

हिन्दुस्तान पेट्रोलियम ने जवाब में कहा, "भारत सरकार ने पेट्रोल की कीमतों का 26 जून 2010 से और डीजल की कीमतों का 19 अक्टूबर 2014 से मार्केट के आधार पर निर्धारण होना तय कर दिया है." जवाब से साबित होता है कि पेट्रोल उत्पादों की कीमतें तय होने में सरकार की कोई भूमिका नहीं है. लेकिन इसी आरटीआई के जवाब में कच्चे तेल (क्रूड) और पेट्रोल-डीजल की कीमतों का हवाला दिया गया है जिससे पता चलता है कि क्रूड की कीमतों में बढ़ोत्तरी के बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर रहीं.

Popular posts from this blog

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी 

  सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए मोदी सरकार के बिल के पास होने के बाद इसे संवैधानिक तौर से सोमवार को लागू कर दिया गया. सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में सोमवार शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई. इसके साथ ही सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिह्नित करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.’ संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन के साथ ही एक उपबंध जोड़ा गया है. इसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है. गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने...

BSP से गठबंधन के बाद बोले अखिलेश यादव- BJP नेता- कार्यकर्ता पस्त, 

साथ आने को बेचैन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके भारतीय जनता पार्टी पर अटैक किया. उन्होंने लिखा कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमारे गठबंधन के बाद बीजेपी का बूथ चकनाचूर हो गया है. अब बीजेपी के लोग सपा-बसपा में शामिल होना चाहते हैं. बता दें, शनिवार को सपा ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने लिखा, 'बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं. अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’. ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं.' बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर...

हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

    भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है। आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है। राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और के...