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वायुसेना में सितंबर 2019 तक शामिल होगा राफेल, तैयारियां शुरू





राफेल सौदे को लेकर देश में चल रही राजनीति और विवादों के बीच भारतीय वायुसेना के बेड़े में राफेल लड़ाकू विमान को शामिल करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं. अगले साल सितंबर तक पहला विमान भारतीय बेड़े में शामिल हो सकता है.

गौरतलब है कि वायुसेना के विमानों के बेड़े में तेजी से आ रही कमी को ध्यान में रखते हुए भारत ने फ्रांसिसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन के साथ 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को 25 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है.

भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ 36 विमानों की खरीद के लिए 7.89 बिलियन यूरो यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 59,000 करोड़ रुपये का सौदा किया है. भुगतान की योजना के अनुसार हमने फ्रांसीसी पक्ष को 25 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है. इसके लिए फ्रांस के साथ नियम और शर्तों का निर्धारण किया गया था.

हाल ही में वायुसेना के डिप्टी चीफ ने फ्रांस का दौरा करके राफेल लड़ाकू विमान की क्षमता को बढ़ाने की दिशा में बात की. वायुसेना के मुताबिक उन्हें राफेल विमानों की बहुत ज्यादा जरूरत है. अगर ये विमान समय पर नहीं आते हैं तो वायुसेना की स्क्वॉड्रन क्षमता के लिए कई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं.

वायुसेना को अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए जंगी जहाजों के 42 स्क्वॉड्रन यानी बेड़े की जरूरत होती है, लेकिन इस समय वायुसेना महज 31 से काम चला रही है.

कांग्रेस राफेल सौदे को लेकर सरकार पर अनिल अंबानीकी रिलायंस के लिए पक्षपात करने का आरोप लगा रही है, ताकि कंपनी को तीन हजार करोड़ रुपये का ऑफसेट करार मिल सके. हालांकि,  केंद्र और फ्रांस की सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है.

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