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SC-ST एक्‍ट के विरोध में संत सड़कों पर, मोदी सरकार को चेतावनी






एससी- एसटी कानून और जातीय आरक्षण को लेकर मोदी सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. एक तरफ देश के अलग-अलग इलाकों में सवर्णों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है तो वहीं अब संत समाज ने भी मोर्चा खोल दिया है.

इस मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए बदायूं से पंडित राहुल शर्मा दंडवत समेत अन्य संत 96 दिनों का सफर तय दिल्ली पहुंचे हैं. साधुओं की टोली ने सरकार से गुहार लगाई है कि जाति आधार की बजाए आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू की जाए. पंडित राहुल शर्मा ने आजतक से बातचीत में कहा कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में ग्रेजुएट शख्स रिक्शा चला रहा है और अंगूठा छाप मंत्री बन गए हैं. इसलिए सरकार से गुजारिश है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए.

22 मई को बदायूं से निकले

पंडित राहुल शर्मा 22 मई को दंडवत यात्रा करते हुए बदायूं से दिल्ली की ओर निकले थे. 25 अगस्त को दिल्ली के तिलक मार्ग पर यात्रा पहुंची लेकिन पंडित राहुल शर्मा का कहना है कि पुलिस ने उन्हें तिलक मार्ग से आगे यात्रा की अनुमति नहीं दी जिसके बाद उन्होंने पदयात्रा शुरू की.

यह साधु एससी- एसटी एक्ट पर मोदी सरकार द्वारा लाए गए कानून से भी नाराज हैं. राहुल शर्मा ने कहा कि मोदी सरकार को यह अधिकार किसने दिया कि वह कानून लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलट दें. राहुल शर्मा ने एससी-एसटी एक्ट पर देशभर में सवर्णों के प्रदर्शन को समर्थन देते हुए इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को सीधे-सीधे जिम्मेदार ठहराया.

पंडित राहुल शर्मा के साथ स्वामी पुनीत नारायण भी जातीय आरक्षण के विरोध में जंतर-मंतर तक पदयात्रा का हिस्सा बने. पुनीत नारायण ने कहा कि वह प्रधानमंत्री की तरह मन की बात नहीं कर सकते लेकिन प्रधानमंत्री को अब जन की बात करनी चाहिए. एससी-एसटी एक्ट पर मोदी सरकार के कानून से नाराज पुनीत नारायण ने सरकार पर निशाना साधा.

महाराज पुनीत नारायण ने इस कदम को चुनाव के ठीक पहले उठाया गया फैसला करार दिया. पंडित पुनीत नारायण ने तो यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खुद एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं. एक चाय वाले होने के नाते उन्होंने गरीबों की स्थिति देखी है. क्या उनको यह नहीं समझना चाहिए कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए? 

नाराज संत समाज की ओर से मोदी सरकार को लेकर चुनौती भी दी गई है. संत समाज का कहना है कि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो खामियाजा लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है.

साधुओं के जत्थे में शामिल

वहीं एक अन्य संत स्वामी अरुणानंद का आरोप है कि सरकार एससी-एसटी एक्ट के जरिए हिंदू समाज को बांट रही है. क्या लोकसभा चुनाव में साधु समाज के गुस्से का सामना मोदी सरकार को करना पड़ेगा? इस सवाल के जवाब में स्वामी अरुण आनंद ने कहा, "अगर सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी तो हम तन-मन-धन से कुर्बानी देने को तैयार हैं. हमारे युवा भीख मांगने के लिए तैयार हैं, इसलिए सरकार को राजनीतिक परिणाम भी देखने को मिलेंगे."

  

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