Skip to main content

लंबे समय के बाद एक मंच पर साथ नजर आएंगे अमित शाह-वसुंधरा





राजस्थान में चुनावी साल की वजह से बीजेपी अध्यक्षअमित शाह इन दिनों लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं. इसी क्रम में शाह बुधवार को जयपुर में एकदिवसीय दौरे पर आएंगे. अहम यह है कि अब तक बीजेपी अध्यक्ष के कार्यक्रमों से दूर रहीं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस बार शाह के साथ मंच साझा करेंगी.

राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण द्वारा निर्मित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक के लोकार्पण कार्यक्रम में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ केंद्रीय मंत्री पीयुष गोयल भी शामिल होंगे. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे करेंगी. लोकार्पण समारोह के बाद अमित शाह धानक्या गांव में 35 विधानसभा क्षेत्रों के बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करेंगे. इस कार्यकर्ता सम्मेलन में शाह के साथ पीयूष गोयल, वसुंधरा राजे और राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भी शामिल होंगे.

बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद शाह जयपुर में चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक में हिस्सा लेंगे. इस बैठक का संयोजक केंद्रीय कृषि मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को बनाया गया है. बता दें कि शेखावत को अध्यक्ष बनाने को लेकर वसुंधरा राजे और अमित शाह में तनातनी चल रही थी. अब तक मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चुनाव प्रचार अभियान की कमान अपने हाथ में ले रखी थी तो पार्टी की तरफ से अमित शाह के कार्यक्रम बनाए जा रहे थे. अब माना जा रहा है कि चुनाव प्रचार का सारा जिम्माविधानसभा चुनाव प्रबंधन समिति को दिया जाएगा.

गौरतलब है कि 11 सितंबर से अब तक अमित शाह जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, भरतपुर, अजमेर और कोटा संभाग में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक और सम्मेलन कर चुके हैं. लेकिन इन सम्मेलनों में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मौजूद नहीं रहीं. मुख्यमंत्री राजे इस दौरान राजस्थान गौरव यात्रा में व्यस्त रहीं. हालांकि एक-दो बार ऐसा समय भी आया जब मुख्यमंत्री की यात्रा नहीं थी और शाह की राजस्थान में सभा थी लेकिन वसुंधरा राजे और अमित शाह एक मंच पर दिखाई नहीं दिए. जिसे लेकर सियासी गलियारों में गुटबाजी की चर्चाएं हुईं.

हालांकि बुधवार को ऐसा नहीं होगा. स्मारक के लोकार्पण समेत बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन और चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक में भी दोनों साथ नजर आएंगे.

  

Popular posts from this blog

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी 

  सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए मोदी सरकार के बिल के पास होने के बाद इसे संवैधानिक तौर से सोमवार को लागू कर दिया गया. सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में सोमवार शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई. इसके साथ ही सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिह्नित करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.’ संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन के साथ ही एक उपबंध जोड़ा गया है. इसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है. गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने...

BSP से गठबंधन के बाद बोले अखिलेश यादव- BJP नेता- कार्यकर्ता पस्त, 

साथ आने को बेचैन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके भारतीय जनता पार्टी पर अटैक किया. उन्होंने लिखा कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमारे गठबंधन के बाद बीजेपी का बूथ चकनाचूर हो गया है. अब बीजेपी के लोग सपा-बसपा में शामिल होना चाहते हैं. बता दें, शनिवार को सपा ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने लिखा, 'बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं. अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’. ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं.' बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर...

हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

    भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है। आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है। राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और के...