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राजस्थान में किसानों का आंदोलन, वसुंधरा सरकार के लिए 'सिरदर्द'





राजस्थान में चुनाव नजदीक आते ही अपनी मांगों को लेकर किसान फिर से आंदोलनरत हो गए हैं. किसानों के आंदोलन को जनसमर्थन भी मिल रहा है. राज्य में सबसे ज्यादा खेती के इलाके श्रीगंगानगर के किसान सिंचाई के पानी के लिए सड़क पर उतर गए हैं.

यहां पर किसान सिंचाई के लिए पानी और फिरोजपुर फीडर के मरम्मत की मांग को लेकर कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई होते नहीं देख मंगलवार को जिलेभर के किसान एकजुट हुए और जिला कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए.

हजारों की संख्या में बैठे किसानों के लिए खाने-पीने का भी पूरा इंतजाम किया गया है. किसानों ने यहीं पर अपना लंगर भी डाल लिया है. किसानों के महापड़ाव को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है. वसुंधरा सरकार के समय ही इसी इलाके में पानी को लेकर बड़ा किसान आंदोलन हुआ था जिसमें पुलिस फायरिंग में कई किसान मारे गए थे.

किसानों का आरोप है कि उनके हक का पानी उन्हें नहीं दिया जा रहा है. किसानों के अनुसार पंजाब से बहकर आने वाली नहरों में पानी की कटौती हो रही है. किसानों तक 2200 क्यूसेक पानी सिंचाई के लिए दिया जाना चाहिए जबकि इसका आधा पानी इन तक पहुंच पा रहा है.

फिरोजपुर फीडर की मरम्मत के लिए लगातार किसान मांग करते आ रहे हैं, साथ ही नहरों में आ रहे केमिकल युक्त पानी से भी यहां की जनता को निजात मिलनी चाहिए क्योंकि इस केमिकल वाले पानी से लोग बीमार हो रहे हैं.

हालांकि राजस्थान सरकार की तरफ से इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा. इनका आरोप है कि सरकार की बेरुखी का खामियाजा यहां की आम जनता और किसानों को भुगतना पड़ रहा है. यही वजह है कि इलाके के किसानों ने अब अपने हक के लिए हुंकार भरी है और अब उन्होंने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर महापड़ाव डाल दिया. इसके साथ ही किसानों ने चेतावनी भी दी है अगर मांगें नहीं मानी गई तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा.

किसानों का कहना है कि आज श्रीगंगानगर में किसान आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रचते हुए गंगानहर को तोड़ा गया है . गंगनहर में पूरा पानी और रिलाइनिंग सहित अनेक मुद्दों को लेकर किसान मंगलवार को गंगासिंह चौक पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे. अधिकारी इस आंदोलन को नाकाम करने के लिए बीकानेर कैनाल के हैड से क्षमता से अधिक पानी छुड़वा नहर को तोडा गया है  नहर ज्यादा पानी नहीं झेल सकी और टूट गई है जिससे किसानों की फसल पानी में डूब गई है.

विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस समेत कई पार्टियों के नेता किसानों के धरने में पहुंचकर इनको समर्थन दे रहे हैं जबकि चुनाव से ठीक पहले बीजेपी सरकार के लिए ये बड़ा सिरदर्द बन गया है.

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