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राजस्थान विश्वविद्यालय में सभी पदों पर निर्दलीयों ने मारी बाजी






राजस्थान में कहा जाता है कि चुनावी साल में विश्वविद्यालय छात्रसंघ जितने वाले विधानसभा चुनाव जीतते हैं. लेकिन राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव के परिणाम बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए चेतावनी है. छात्र संगठनों के इन चुनावों में छात्रों ने बीजेपी के एबीवीपी और कांग्रेस की एनएसयूआई से ज्यादा निर्दलीयों पर भरोसा किया है.

राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों के परिणामों के बाद अब चर्चा होने लगी है कि क्या इस बार विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार बड़ी संख्या में जीतेंगे. राज्य के सबसे बड़े राजस्थान विश्वविद्यालय की तो सभी सीटों पर निर्दलीय जीते हैं. अध्यक्ष पद एनएययूआई के बागी विनोद जाखड़ ने एबीवीपी के प्रत्याशी को मात दी. वहीं महासचिव पद पर एबीवीपी के बागी आदित्य प्रताप सिंह जीते. उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर भी निर्दलीय ही जीते.

जयपुर से संस्कृत विश्वविधालय में अध्यक्ष पद पर एबीवीपी जीती है जबकि पिछली बार एनएसयूआई जीती थी.

बीकानेर के गंगा सिंह विश्वविद्यालय में भी निर्दलीय सीमाराज पुरोहित जीती हैं. जबकि पिछली बार यहां एबीवीपी का कब्जा था. कोटा में भी निर्दलीय उम्मीद्वार चंद्रशेखर शर्मा जीते हैं, यहां पिछले कई सालों से एबीवीपी जीतती आ रही थी.

अजमेर के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में पांच साल बाद सभी पदों पर एबीवीपी जीती है. पिछली बार निर्दलीय जीते थे. उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में अध्यक्ष और महासचिव पद पर एबीवीपी के हिमांशु बागड़ी और अरविंद सिंह देवड़ा जीते हैं. जबकि उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर निर्दलीय चुनाव जीते हैं.

उदयपुर के कृषि विश्वविद्यालय में अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई जीती है, पिछली बार भी यहां एनएसयूआई जीती थी. जबकि महासचिव पद पर एबीवीपी जीती है.

जोधपुर के जयनरायण विश्वविद्यालय में एबीवीपी के उम्मीदवार अध्यक्ष पद पर आगे चल रहे हैं. पिछली बार भी यहां एबीवीपी जीती थी.

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