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मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का 'प्लान 75'





इस साल के अंत में होने वाले मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में तकरीबन 75 सीटों पर कांग्रेस ने विशेष रणनीति तैयार की है. बीजेपी के दिग्गजों को घेरने के लिए कांग्रेस सेवा दल उन सीटों पर डोर टू डोर प्रचार अभियान चलाने जा रहा है जहां पिछले कई चुनावों में कांग्रेस को लगातार हार झेलनी पड़ी है.

घर घर दस्तक देने के इस अभियान के लिए संगठन की तरफ से मध्यप्रदेश की ऐसी 30, राजस्थान की  25 और छत्तीसगढ़ में 20 सीटों का चुनाव किया जा रहा है, जहां सेवा दल की विशेष रूप से प्रशिक्षित टीमें कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगी.

लंबे समय बाद चुनाव में जमीन पर पूरी सक्रियता से उतरने जा रहा सेवा दल उन सीटों पर प्रचार करेगा जहां पिछले पांच-छह बार से कांग्रेस हार रही है और भाजपा के दिग्गज चुनावी मैदान में हैं.

सेवा दल के मुख्य संगठक लालजीभाई देसाई ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है कि, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय सेवा दल कांग्रेस के लिए सक्रिय रूप से प्रचार करता था, लेकिन पिछले कई वर्षों से यह नहीं हो पा रहा था. अब हम आगामी विधानसभा चुनावों में यह फिर शुरू करने जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, सेवा दल करीब 75 सीटों का चुनाव कर रहा है जिस पर पार्टी नेतृत्व से बातचीत हो गई है. पहले इन सीटों के मुद्दों को लेकर सर्वेक्षण कराए जाएंगे और फिर भाजपा के महारथियों के खिलाफ हमारा डोर टू डोर प्रचार आरंभ होगा.

सेवा दल ने मध्य प्रदेश में प्रचार के लिए जिन 30 सीटों का चयन किया है उनमें पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल गौर की सीट गोविंदपुरा (भोपाल) और ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव की सीट रेहली (सागर) शामिल हैं.

देसाई का कहना है कि, सेवा दल इन सीटों पर प्रचार के लिए ऐसे कार्यकर्ताओं को उतार रहा है जो चुनाव के संदर्भ में विशेष रूप से प्रशिक्षित होंगे. इन सीटों में हर बूथ पर सेवा दल के कार्यकर्ता होंगे जो कांग्रेस के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय रखेंगे. 

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस सेवा दल का गठन वर्ष 1923 में हिंदुस्तान सेवा दल के नाम से हुआ था. बाद में इसे कांग्रेस सेवा दल का नाम दे दिया गया. सेवा दल की संरचना आज के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरह है. जिसके कार्यकर्ता सरकार और पार्टी में विशेष पद की महत्वकांक्षा न रखते हुए निस्वार्थ भाव से कार्य करते हैं. जबकि इसके करीब दो साल बाद 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में संघ की स्थापना की. संघ से दो साल पहले बना सेवादल न सिर्फ उसके मुकाबले काफी पिछड़ गया बल्कि खत्म होने की कगार पर आ गया. जिसे अब कांग्रेस की तरफ से पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है.

  

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