Skip to main content

अब बदल सकेंगे 2000 और 200 रुपये के नोट, RBI ने बनाए नए नियम




आगे से जब आप 200 और 2000 रुपये के कटे-फटे या गंदे नोट लें तो ध्यान रखें. अगर ये नोट हल्के कटे-फटे हैं तो ये पूरी कीमत पर बदले जा सकेंगे, लेकिन अगर ज्यादा कटे-फटे हुए हैं तो इसके लिए आपको आधी कीमत मिलेगी और ऐसा हो भी सकता है कुछ भी कीमत न मिले.

दरअसल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कटे-फटे या गंदे नोटों को लेकर अपने नियम में संशोधन किया है. 200 और 2000 रुपये के नोट महात्मा गांधी सीरीज के हिस्से के तहत लाए गए थे.  इसके साथ ही नोटबंदी के बाद जारी किए 200 और 2000 रुपये के नोटों को बदलने को लेकर लोगों के मन में जो भी शंका थी उसकोआरबीआई ने खत्म कर दिया है.

अब तक 5, 10, 20, 50, 100, 500 रुपये के कटे-फटे या गंदे नोटों को बदलने का नियम था, लेकिन 200 और 2000 रुपये के नोटों को बदलने को लेकर लोगों को दिक्कत हो रही थी. 2000 और 200 रुपये के नोटों को नवंबर 2016 और सितंबर 2017 में जारी किया था.

इन नोटों के अलग आकार होने के कारण ये पुराने नियम के तहत नहीं आ सकते थे. आरबीआई ने वित्त मंत्रालय से नए नोटों को लेकर नियम साफ करने को कहा था. आरबीआई ने 2009 के नोट रिफंड नियम में संशोधन किया. और कहा कि नई महात्मा गांधी सीरीज के नोट भी इस नियम के अंतर्गत बदले जा सकेंगे.

भारतीय रिज़र्व बैंक (नोट रिफंड) संशोधन नियम, 2018 के अनुसार  2000 के नोट की पूरी कीमत के लिए ग्राहक को नोट के वास्तविक आकार का कम से कम 88 वर्ग सेंटीमीटर हिस्सा देना होगा. 44 वर्ग सेंटीमीटर हिस्सा लौटाने पर नोट की आधी कीमत मिलेगी.  200 के नोट की पूरी कीमत के लिए ग्राहक के पास नोट के वास्तविक आकार का कम से कम 78 वर्ग सेंटीमीटर और आधी कीमत के लिए 39 वर्ग सेंटीमिटर हिस्सा होना चाहिए.

इसी सीरीज के 100 रुपए के नोट के 75 वर्ग सेंटीमीटर हिस्से पर पूरी कीमत मिल सकेगी. वहीं, आधी कीमत के लिए 38 वर्ग सेंटीमीटर हिस्से की जरूरत पड़ेगी.  50 रुपए के नोट का 72 वर्ग सेंटीमीटर हिस्सा लाने पर ही ग्राहक को पूरी और 36 वर्ग सेंटीमीटर पर आधी कीमत मिलगी.

Popular posts from this blog

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी 

  सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए मोदी सरकार के बिल के पास होने के बाद इसे संवैधानिक तौर से सोमवार को लागू कर दिया गया. सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में सोमवार शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई. इसके साथ ही सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिह्नित करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.’ संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन के साथ ही एक उपबंध जोड़ा गया है. इसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है. गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने...

BSP से गठबंधन के बाद बोले अखिलेश यादव- BJP नेता- कार्यकर्ता पस्त, 

साथ आने को बेचैन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके भारतीय जनता पार्टी पर अटैक किया. उन्होंने लिखा कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमारे गठबंधन के बाद बीजेपी का बूथ चकनाचूर हो गया है. अब बीजेपी के लोग सपा-बसपा में शामिल होना चाहते हैं. बता दें, शनिवार को सपा ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने लिखा, 'बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं. अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’. ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं.' बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर...

हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

    भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है। आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है। राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और के...