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पूर्ण राज्य की मांग, सिर पर बंडल रखकर PMO पहुंचे AAP विधायक





दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी विधायकों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में 10 लाख लोगों के हस्ताक्षर की चिट्ठी सौंपी है. आम आदमी पार्टी का आरोप है कि चुनाव से पहले कांग्रेस और बीजेपी ने अपने चुनावी एजेंडे में पूर्ण राज्य के मसले को रखा, लेकिन दोनों ही राजनीतिक दल इस मुद्दे को चुनाव के बाद भूल गए.

मुख्यमंत्री निवास से संसद मार्ग पहुंचे आम आदमी पार्टी के विधायकों ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर नारे लगाए. यहां से पांच विधायक प्रतिनिधियों को चिट्ठियों को पीएम दफ्तर पहुंचाने की इजाजत दी गई. दावा किया जा रहा है कि 10 लाख हस्ताक्षर वाली चिट्ठियों में लोगों ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर, आम आदमी पार्टी सरकार का समर्थन किया है.

आम आदमी पार्टी से उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा प्रभारी दिलीप पाण्डेय ने कहा कि दिल्ली अपने अधूरेपन की वजह से परेशान है. उसे पूरा करने के लिए दस लाख लोगों ने चिट्ठी के जरिए प्रधानमंत्री को अपना संदेश भेजा है. दिल्ली अपना हक चाहती है और साथ ही चाहती है कि पूर्ण राज्य का अधिकार, जो अपने फैसले लेने और विकास की दिशा में चलने का पूरा साधन है. उम्मीद है कि हर हफ्ते अपनी 'मन की बात' करने वाले प्रधानमंत्री दिल्ली की जनता के 'मन की बात' जरूर सुनेंगे और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देकर उनको सम्मान देंगे."

बीते साढ़े तीन साल में अधिकारी और उपराज्यपाल से टकराव के बाद आम आदमी पार्टी सरकार ने पूर्ण राज्य के मसले को गरमाना शुरू किया. आम आदमी पार्टी ने इस मसले पर 1 जुलाई को इंदिरा गांधी स्टेडियम में जनसभा भी बुलाई थी और पूरी दिल्ली में हस्ताक्षर अभियान चलाने का एलान किया. पार्टी नेता गोपाल राय के मुताबिक 10 लाख लोगों के हस्ताक्षर का काम 15 अगस्त तक पूरा कर लिया गया था. राष्ट्रीय शोक की वजह से 17 अगस्त पीएम से मिलने पार्टी के नेता नहीं जा सके. लिहाजा अब 27 अगस्त को प्रधानमंत्री को चिट्ठी सौंपने का फैसला किया गया है.

फ़िलहाल जिस संविधान पीठ के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से सीधे दो दो हाथ की तैयारी की है, उसी संविधान पीठ ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने से इनकार भी किया है. हालांकि मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी की नजर दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर है. लिहाजा लोक सभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी इसे बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है.

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