Skip to main content

अब भारत में भी लोगों की जान ले रहा है मोमो चैलेंज






ब्लू व्हेल चैलेंज, किकी चैलेंज और मोमो चैलेंज. सोशल मीडिया पर पाए जाने वाले इन खतरनाक खेलों में ऐसा क्या होता है. जो लोग इनके चक्कर में आकर अपनी जान गंवाने तक को राज़ी हो जाते हैं. दरअसल, इंटरनेट पर पाए जाने वाले ये खेल यूज़र के दिमाग से खेलने की कोशिश करते हैं. और चैलेंज के ज़रिए उन्हें मकड़जाल में इस तरह फंसा देते हैं कि इंसान तैश में आकर कुछ भी कर गुज़रता है. खासकर मोमो चैलेंज में तो व्हाट्सएप पर अनजान नंबर से आए मैजेस का रिप्लाई करने भर से ही इंसान इनके जाल में फंसना शुरू हो जाता है. और चैलेंज लेने से इनकार करने पर तो ये लोग उसे खुदकुशी करने तक के लिए मजबूर कर देते हैं.

अनजान नंबर से आती है खौफनाक तस्वीर

पहले ब्लू व्हेल चैलेंज फिर किकी चैलेंज और अब मोमो चैलेंज. एक अजीब सी डरावनी तस्वीर. जिसकी दो बड़ी-बड़ी गोल आंखें हो, जो हल्के पीले रंग की दिखती हो, जिसकी एक डरावनी से मुस्कान हो और टेढ़ी-मेढ़ी नाक हो. अचानक से आपके व्हॉट्सएप मैसेज पर किसी अनजान नंबर से ऐसी कोई तस्वीर आए, तो ज़रा संभल जाइएगा. क्योंकि दुनियाभर में अब ये आतंक और खौफ की नई वजह हैं. इस शैतानी हंसी की दहशत इस कदर है कि दुनिया भर में सोशल मीडिया पर परेशानी का सबब बने इस चैलेंज के बारे में मां-बाप को चेतावनी भी जारी की रही है.

मोबाइल में एक मैसेज और 'गेम ओवर'

तो फिर अगर वाट्सऐप मैसेज पर ऐसे किसी अनजान नंबर से ऐसी कोई तस्वीर आए तो करें क्या. आपको करना बस ये है कि आपको कुछ नहीं करना है. यानी उसका जवाब मत दीजिए. क्योंकि इधर आपने मैसेज का रिप्लाई किया और उधर आप इस शैतानी हंसी के जाल में फंस गए समझिए. ब्लू व्हेल के बाद अब नया जानलेवा गेम

ब्लू व्हेल चैलेंज अभी आप भूले नहीं होंगे. जिसने पूरी दुनिया के अलावा हिदुस्तान में भी कई जानें लील लीं. अभी उस खौफ की तस्वीरें ज़हन से मिटी भी नहीं थीं कि अब सोशल मीडिया पर एक जानलेवा गेम आ गया है. नाम है मोमो चैलेंज. ब्लू व्हेल जितना ही खतरनाक और जानलेवा. भारत में भी अब तक इस गेम के झांसे में आकर कई लोग अपनी जान गवां बैठे हैं. मोमो चैलेंज कितना खतरनाक है और कैसे ये ले रहा है लोगों की जान ये बताने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि आखिर ये मोमो चैलेंज है क्या.

क्या है ये मोमो चैलेंज?

* व्हॉट्सएप पर अंजान नंबर से आता है मैसेज

* मैसेज करने वाला अपने आपको बताता है 'मोमो'

* नंबर पर बात करने के लिए मिलता है चैलेंज

* फोन पर डरावनी तस्वीरें और वीडियो आते हैं

* अनजान 'मोमो' अपना नंबर सेव करने को कहता है

* लोगों को दिए जाते हैं कई तरह के टास्क

* टास्क पूरा ना करने पर मिलती हैं धमकियां

* डरकर खुदकुशी को मजबूर हो जाते हैं लोग

भारत में भी जान ले रहा है मोमो चैलेंज

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक मोमो चैलेंज की वजह से भारत में तीन लोग सुसाइड कर चुके हैं. और ये तीनों ही मामले पश्चिम बंगाल में सामने आए हैं. इसके अलावा सूबे के ही जलपाईगुड़ी, कुर्सेओंग और पश्चिम मिदनापुर ज़िले से मोमो चैलेंज की वजह से खुदकुशी की कोशिश के मामले रिपोर्ट किए गए हैं. लिहाज़ा बंगाल में इस गेम को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है. खुद पुलिस अधिकारी ट्वीटर और दूसरे माध्यमों से माता-पिता को इस जानलेवा गेम को लेकर आगाह कर रहे हैं. ताकि वो अपने बच्चों पर नज़र रखें. इसके अलावा पश्चिम बंगाल सीआईडी ने भी सार्वजनिक नोटिस जारी करके लोगों को सलाह दी कि अगर उन्हें मोमो चैलेंज गेम खेलने का इनविटेशन मिले तो वो पुलिस से संपर्क करें. इससे पहले यूपी पुलिस और मुंबई पुलिस भी ऐसी एडवाइज़री जारी कर चुकी हैं.

किसी ने काट ली नस, किसी ने लगा ली फांसी

मोमो चैलेंज की वजब से देशभर के मम्मी पापा अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर काफी परेशान हैं. एक भयानक ट्रेंड के चलते बच्चे ऑनलाइन गेम्स के झांसे में आकर न सिर्फ खुद को नुकसान पहुंचा रहे हैं बल्कि जान भी दे रहे हैं. भारत में ये गेम पिछले करीब 2-3 महीने से कोहराम मचाए हुए है. मोमो चेलेंज लेकर अपनी जान गंवाने वालों में किसी ने नसें काट लीं. तो किसी ने फांसी का फंदा लगा लिया और किसी ने छत से कूदकर जान दे दी. एक बच्ची ने तो खुदकुशी से पहले घरवालों के नाम एक खत लिखा जिसमें एक स्माइली बना हुआ था. जो उस शैतानी हंसी जैसा है.

लोगों के बीच डर का माहौल बनाने और खुदकुशी के लिए मजबूर कर देने वाले इस गेम में आखिर है ऐसा क्या. ये जानना अपने आप में दिलचस्प है. दरअसल, मोमो चैलेंज देने वाला आपको वॉट्सऐप पर एक अनजान नंबर से मैसेज करेगा. पहले वो आपसे हाय-हैलो करता है और धीरे-धीरे बात को आगे बढ़ाता है. अगर आप उस से पूछते हैं कि आप कौन हैं तो वो अपना नाम बताता है 'मोमो'. अपने नाम के साथ वो तस्वीर भी भेजता है.

Popular posts from this blog

सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण की अधिसूचना जारी 

  सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए मोदी सरकार के बिल के पास होने के बाद इसे संवैधानिक तौर से सोमवार को लागू कर दिया गया. सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में सोमवार शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई. इसके साथ ही सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिह्नित करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे.’ संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन के साथ ही एक उपबंध जोड़ा गया है. इसके जरिए राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है. गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने...

BSP से गठबंधन के बाद बोले अखिलेश यादव- BJP नेता- कार्यकर्ता पस्त, 

साथ आने को बेचैन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके भारतीय जनता पार्टी पर अटैक किया. उन्होंने लिखा कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. अखिलेश ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमारे गठबंधन के बाद बीजेपी का बूथ चकनाचूर हो गया है. अब बीजेपी के लोग सपा-बसपा में शामिल होना चाहते हैं. बता दें, शनिवार को सपा ने मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया था. दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अखिलेश यादव ने लिखा, 'बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं. अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’. ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं.' बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर...

हिंदुत्व के साइनबोर्ड पर भाजपा संगठन और विकास के बूते लड़ सकती है 2019 का चुनाव

    भाजपा हिंदुत्व को नहीं छोड़ सकती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि संघ भाजपा का मातृसंगठन है और उसका आधार हिंदुत्व है। संघ के मुख पत्र आर्गनाइजर ने अपने संपादकीय में भाजपा को हिंदुत्व और विकास के मुद्दे को समान महत्व देने का सुझाव दिया है। आर्गनाइजर की संपादकीय से साफ है कि भाजपा और संघ के भीतर हिन्दुत्व और हिन्दुत्व से जुड़े राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। भाजपा के महासचिव राम माधव लंबे समय से संघ के अघोषित प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने अधिकारिक बयान देते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण को लेकर आध्यादेश का विकल्प हमेशा रहा है। राम माधव का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने चार जनवरी को अगली बेंच के निर्धारण के लिए तारीख दी है। भाजपा को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय फास्ट ट्रैक तरीके से इस मामले की सुनवाई करके जल्द फैसला देगी। राम माधव ने कहा कि ऐसा नहीं होता, तो अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। राम माधव के इस बयान को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा लखनऊ में दिए वक्तव्य से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा और के...