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कोटा विधानसभा: वो सीट जहां 66 साल से एक ही पार्टी जीत रही है





छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की कोटा विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का सबसे मजबूत दुर्ग माना जाता है. ये ऐसी सीट है 66 साल से कांग्रेस का कब्जा है. पिछले 14 विधानसभा चुनाव हुए कांग्रेस के सिवा किसी दूसरी पार्टी का खाता नहीं खुला है. हालांकि इस बार बदले राजनीतिक समीकरण में बीजेपी कमल खिलाने की उम्मीद में नजर आ रही है.

दरअसल इस सीट पर पिछले तीन चुनाव से अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी चुनाव जीतती आ रही हैं. कांग्रेस से बगावत कर अजीत जोगी ने जनता कांग्रेस नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार वे कांग्रेस के बजाए जनता कांग्रेस से उम्मीदवार हो सकती हैं.

कोटा में देश का सबसे बड़ा फायरिंग रेंज

रायपुर के बाद बिलासपुर को राज्य का सबसे बड़ा और डेवलेप्ड शहर माना जाता है. यहां पर आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ हाईकोर्ट में भी है जो शहर की शान बढ़ाता है. सीमा सुरक्षा बल(बीएसएफ) ने देश का सबसे बड़ा फायरिंग रेंज करगीरोड कोटा के करीब बन रहा है.

बिलासपुर के पास ही बहने वाली अरपा नदी का खत्म होना यहां की प्रमुख समस्याओं में से एक रहा है. स्थानीय नागरिकों ने कई बार अरपा नदी को बचाने के लिए सत्याग्रह, आंदोलन तक किए हैं, लेकिन लगता है कि अभी तक उसका कोई असर नहीं हुआ है.

कोटा से कौन कितने बार जीता

1952 से लेकर अब कोटा विधानसभा सीट पर 14 बार चुनाव हुए हैं. काशीराम तिवारी पहले विधायक बने थे. जबकि मथुरा प्रसाद दुबे 4 बार, राजेंद्र शुक्ल 5 बार चुने गए. इसके अलावा  2006 में डॉ. रेणु जोगी बनीं पहली महिला विधायक वे पिछले 3 बार से विधायक हैं.

2003 के विधानसभा चुनाव

कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद शुक्ला को 39546 वोट मिले

बीजेपी के भूपेंद्र सिंह को 37866 वोट मिले

2006 में उपचुनाव

कांग्रेस की रेणु जोगी 59465 वोट मिले

बीजेपी के भूपेंद्र सिंह को 35995 वोट मिले

2008 विधानसभा चुनाव

कांग्रेस की रेणु जोगी 55317 वोट मिले

बीजेपी के मूलचंद्र खंडेलवाल को 45506 वोट मिले

2013 विधानसभा चुनाव

कांग्रेस की रेणु जोगी 58390 वोट मिले   

बीजेपी के काशीराम शाहू 53301 वोट मिले

बता दें कि 1952 से 1962 तक यहां काशीराम तिवारी विधायक रहे. 1967 से 80 तक मथुरा प्रसाद दुबे और 5 बार राजेंद्र प्रसाद शुक्ल विधायक चुने गए. उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी उठाई थी. काफी कोशिशों के बाद भी बीजेपी को अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है.

इतिहास बदलने और बरकरार की जंग

कोटा से कांग्रेस ने इतिहास बरकरार रखने के लिए और बीजेपी कमल खिलाने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है. रेणु जोगी इस बार जनता कांग्रेस से जहां उतरने की संभावना है. वहीं कांग्रेस शैलेश पांडेय को उतार सकती है. जबकि बीजेपी के कई दावेदार मैदान में हैं.

छत्तीसगढ़ के बारे में

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं. राज्य में अभी कुल 11 लोकसभा और 5 राज्यसभा की सीटें हैं. छत्तीसगढ़ में कुल 27 जिले हैं. राज्य में कुल 51 सीटें सामान्य, 10 सीटें एससी और 29 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं.

2013 चुनाव में क्या थे नतीजे

2013 में विधानसभा चुनाव के नतीजे 8 दिसंबर को घोषित किए गए थे. इनमें भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में लगातार तीसरी बार कांग्रेस को मात देकर सरकार बनाई थी. रमन सिंह की अगुवाई में बीजेपी को 2013 में कुल 49 विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी. जबकि कांग्रेस सिर्फ 39 सीटें ही जीत पाई थी. जबकि 2 सीटें अन्य दलों के खाते में गई थीं. 2008 के मुकाबले बीजेपी को तीन सीटें कम मिली थीं, इसके बावजूद उन्होंने पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाई. रमन सिंह 2003 से राज्य के मुख्यमंत्री हैं.

  

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