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नीरव मोदी ने 2 लाख डॉलर का हीरा 36 लाख डॉलर में ऐसे बेचा





 न्यूयॉर्क के बैंकरप्सी कोर्ट में दाखिल अमेरिकी जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि नीरव मोदी की विभिन्न कंपनियों के बीच ही एक हीरे को कम से कम चार बार खरीदा-बेचा गया. इससे 1.88 लाख डॉलर के हीरे की कीमत देखते ही देखते 36 लाख डॉलर तक बढ़ा दी गई. यानी मूल कीमत से करीब 20 गुणा ज्यादा. ऐसा इसलिए किया गया कि जिससे ऐसा  दिखाया जा सके कि इन कंपनियों में काफी कारोबार होता है.

जांच से पता चला है कि कम से कम चार बार हीरों की इस तरह राउंड-टिपिंग की गई जिससे कि मोदी की कंपनियों और शेल कंपनियों के बीच 21.30 करोड़ डॉलर तक की ऊंची बिक्री दिखाई जा सके.

अमेरिका में ‘बैंकरप्सी कोर्ट सदर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क’ को सौंपे गए 165 पन्नों के डोजियर को जॉन जे कार्नी ने तैयार किया है. अमेरिकी बैंकरप्सी कोर्ट ने कार्नी को अमेरिका स्थित तीन जूलरी कंपनियों के लिए एग्जामिनर नियुक्त किया था. इन तीनों कंपनियों का मालिकाना हक पीएनबी घोटाले के अभियुक्त नीरव मोदी के पास है.

3.27 कैरट के हीरे (फैंसी विविड येलो ऑरेंज कुशन कट SI1) को 8 अगस्त और 13 सितंबर 2011 के बीच तीन बार निर्यात और एक बार आयात किया गया.

हैरानी की बात है कि हीरा विशेषज्ञों ने इसी अवधि में इस गुणवत्ता के एक हीरे की सार्वजनिक नीलामी में 1.88 लाख डॉलर में बिकने की पुष्टि की.

न्यूयॉर्क कोर्ट में दाखिल डोजियर के मुताबिक, 8 अगस्त 2011 को फायरस्टार डायमंड इंक (FDI, पुराना नाम फायरस्टोन इंक) ने ये हीरा फैंसी क्रिएशन्स कंपनी लिमिटेड को 1,098,802 लाख डॉलर में बेचा.

तीन हफ्ते बाद ही नीरव मोदी के पारिवारिक ट्रस्ट की कथित भागीदारी फर्म सोलर एक्सपोर्ट्स ने हीरे को वापस FDI को निर्यात किया लेकिन कहीं कम कीमत 183,087 डॉलर में. हालांकि ये कीमत हीरे की मूल कीमत के करीब थी. 6 दिन बाद ही FDI ने इस हीरे को फिर फैंसी क्रिएशन कंपनी लिमिटेड को 1,156,043 डॉलर में निर्यात किया.

आखिरकार दो हफ्ते बाद नीरव मोदी के मालिकाना हक वाली कंपनी ए. जाफे ने हीरे को संदीप मिस्त्री (फायरस्टार इंडिया का कर्मचारी) की कंपनी ‘वर्ल्ड डायमंड’ को 1,218,991 डॉलर में बेचा. रिकॉर्ड्स से ये भी पता चलता है कि FDI को निर्देश मिले थे कि हीरे को मिस्त्री से आगे बढ़ा दिया जाए.

जांच से ये निष्कर्ष निकला कि मोदी की कंपनियां विभिन्न वैश्विक ठिकानों से एक ही फंड की राउंड ट्रिपिंग में लगी थीं जिससे मोटे कारोबार को दिखा कर ज्यादा से ज्यादा लैटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoUs) हासिल किए जा सकें.

रिपोर्ट के मुताबिक मोदी की भारत स्थित कंपनियां हीरों को आपस में ही घुमाती रहती थीं. वहीं मोदी के नियंत्रण वाली दुनिया के और हिस्सों में फैली कंपनियां शिपिंग इन्वायस बनाती थीं जो कि पीएनबी को देकर और  LOUs हासिल किए जा सकें.

फायरस्टार नियंत्रित 20 से ज्यादा शेल कंपनियां यहीं आभास देती थीं कि वे स्वतंत्र तीसरी पार्टी हैं. इन्हीं के जरिए भारत, यूएई और हांगकांग के बीच राउंड ट्रिपिंग लेनदेन होते थे. ये शिपमेंट सिर्फ कस्टम रिकॉर्ड बनाने के लिए किए जाते थे जिससे कि पुराने LoUs के लिए नए LoUs लिए जा सकें.

रिपोर्ट में जिन शेडो कंपनियों का हवाला दिया गया, वे हैं-

ऑराजेम कंपनी लि.

ब्रिलिएंट डायमंड्स लि.

एम्पायर जेम्स FZE.

इटर्नल डायमंड्स कॉरपोरेशन लि.

फैंसी क्रिएशंस कंपनी लि.

पैसेफिक डायमंड्स FZE.

ट्राई कलर जेम्स FZE.

यूनिक डायमंड एंड जूलरी FZC,

यूनिवर्सल फाइन जूलरी FZE और विस्टा जूलरी RJE.

वर्ल्ड डायमंड डिस्ट्रीब्यूशन FZE

13 अप्रैल को कोर्ट की ओर से नियुक्त एग्जामिनर को ये तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई कि क्या तीन अमेरिकी कॉरपोरेशन्स की भारत में कथित आपराधिक आचरण में संलिप्तता रही थी. इन तीनों अमेरिकी कॉरपोर्रेशन्स का मालिकाना हक अप्रत्यक्ष तौर पर नीरव मोदी और उसके अधिकारियों और निदेशकों के पास था. एग्जामिनर की जांच में ‘अलवारेज एंड मार्सल डिस्प्यूट्स एंड इंवेस्टीगेशंस’ ने सहायता की, जिसकी अगुआई एफबीआई के रिटायर्ड स्पेशल एजेंट विलियम बी वाल्डी के पास है.

भारतीय फॉरेन्सिक ऑडिटर्स बीडीओ इंडिया ने भी बाद में इस जांच में हिस्सा लिया. बीडीओ इंडिया को पीएनबी ने नीरव मोदी घोटाला सामने आने के बाद आंतरिक ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी थी.

जांचकर्ताओं ने 45 लोगों के इंटरव्यू लिए और विभिन्न स्रोतों से 1.8 टेराबाइट्स डेटा एकत्रित किया. जांच इस नतीजे पर पहुंची कि नीरव मोदी से जुड़ी कंपनियों (अमेरिका स्थित कंपनियां भी शामिल) ने जहां कई शेल कंपनियां संचालित कीं वहीं ये ओवरप्राइजिंग और हीरों की राउंड ट्रिपिंग में भी शामिल थीं. साथ ही इन्होंने अवैध LoUs से जमकर फायदा उठाया.

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